क्या चंपत इशारा कर रहे- राममंदिर निर्माण में लूट हुई:लेटर से यही संकेत; चढ़ावा चोरी के बाद नृपेंद्र एक बार भी चंपत से नहीं मिले

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी से शुरू हुई ‘अंदरूनी कलह’ अब खुलकर सामने आ गई है। एसआईटी की जांच रिपोर्ट में क्लीनचिट मिलने के संकेत के बाद चंपत राय बंसल ने 9 पन्नों का लेटर जारी किया था। इसमें राममंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा सीधे सवालों के घेरे में आ गए।
मंदिर ट्रस्ट से जुड़े एक सदस्य बताते हैं- चढ़ावा चोरी सामने आने के बाद नृपेंद्र मिश्रा ने एक इंटरव्यू में सुरक्षा, सीसीटीवी के डिलीट होने और 1,500 से ज्यादा कर्मचारियों की तैनाती पर सवाल उठाकर चंपत राय को घेरा था। इसके बाद चंपत ने अचानक दूरी बनाकर अयोध्या के कारसेवकपुरम में 'एकांतवास' में चले गए थे।
उस दौरान उनके विरोधियों को लगा कि चंपत की पकड़ ढीली पड़ गई है। लेकिन, चंपत राय ने शांत रहकर सही वक्त का इंतजार किया और एसआईटी की रिपोर्ट कोर्ट में पेश होते ही सीधा 'काउंटर-अटैक' किया। हर 15 दिन पर नृपेंद्र अयोध्या आए, लेकिन चंपत से नहीं मिले चंपत इस बात से भी नाराज दिखते हैं कि नृपेंद्र हर 15 दिन पर अयोध्या आते हैं।
निर्माण समिति की मीटिंग में शामिल होते हैं। फिर लखनऊ या दिल्ली के लिए लौट जाते हैं। नृपेंद्र मिश्रा इस बीच जब भी अयोध्या आए, कभी भी चंपत राय से मुलाकात नहीं की। यह साबित करता है कि मतभेद सिर्फ पत्राचार तक सीमित नहीं हैं, दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला तकरीबन टूट चुका है।
इस विवाद में एक पहलू यह भी है कि नृपेंद्र मिश्रा पूर्व IAS अधिकारी हैं। वहीं, चंपत राय विश्व हिंदू परिषद से आते हैं, जो राम मंदिर आंदोलन से सीधे जुड़े रहे हैं। यही वजह है, लेटर में चंपत राय ने लिखा कि नृपेंद्र मिश्रा ने हमेशा खुद को ही मंदिर निर्माण के सभी निर्णयों का सर्वेसर्वा माना।
आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण से जुड़ा एक भी ऐसा निर्णय नहीं है, जो निर्माण समिति ने खुद न लिया हो। अगर ट्रस्ट ने कोई सुझाव दिया भी, तो उसे अमान्य कर दिया गया या बने हुए निर्माण को हटा दिया गया। लेटर के सख्त तेवर से संकेत मिल रहा है कि मंदिर निर्माण के दौरान कंपनियों के चयन और वित्तीय फैसलों में पारदर्शिता नहीं रखी गई।
अब चंपत राय के इस कदम को नृपेंद्र मिश्रा का हस्तक्षेप खत्म करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, मंदिर निर्माण मार्च, 2027 के बाद पूरा हो जाएगा। सभी निर्माण ट्रस्ट को सौंपने के बाद समिति का क्या औचित्य रहेगा, यह
📡 स्रोत: Dainik Bhaskar