राजनीति

क्या मज़ार पर दीया जलाने से इंसाफ़ का अंधेरा दूर होगा?

लेखक: admin अंतिम अपडेट: 18 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
क्या मज़ार पर दीया जलाने से इंसाफ़ का अंधेरा दूर होगा?

लेखक: मुस्तफा खेडुवोरा

हमारे देश के प्रधानमंत्री जी का जन्मदिन चल गया! हमारे देश के प्रधानमंत्री होने पर हम उन्हें बधाई देते हैं ।किंतु आश्चर्य तब होता है जब इस महानुभाव के जन्मदिन पर दिए जलाने का एक नया ट्रेंड चलाने के लिए ऊपर से आदेश आया। इस आदेश आने के बाद में भारतीय जनता पार्टी के सभी नेता एवं मोर्चा के अध्यक्ष महोदय इस सिलसिले में वीडियो रखकर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करके दीए जलाए।

खुशी के मौके पर दिया जलाना कोई बुरी बात नहीं है परंतु यहां दिया जलाने के संदर्भ में सनातन धर्म की परंपराओं को भी भुला दी गई! क्योंकि जब कोई व्यक्ति विशेष के नाम पर दिया जलाना होता है तो इसकी परंपरा क्या है? खैर! जैसे कोरोना के वक्त में थाली बजाई ,इस तरह ऊपर से आदेश आने पर सभी (हम इन्हें अंधभक्त कहते हैं) द्वारा दिया जलाया गया और इस चेष्टाको संपूर्णत: एक राजनीतिक कार्यक्रम की पहचान मिली।

क्योंकि गरीबों को अपना निर्वाह के लिए तेल भी नहीं मिल रहा है और यहां देशभर में सैकड़ो किलो तेल का व्यय किया गया! कहीं समझदार लोगों ने इस प्रकार के कार्यक्रम की भर्त्सना की।

इस वक्त मुसलमान के आस्था के केंद्र दरगाहों पर भी BJP के माइनॉरिटी फ्रंट के प्रेसिडेंट के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर उनके नाम पर मज़ार पर जाकर दीया जलाने की तस्वीरें सामने आई हैं। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रमुख एवं राज्यों के माइनॉरिटी मोर्चा के प्रमुखों ने इस कार्य को अंजाम दिया। लेकिन सवाल यह है कि क्या इस प्रेसिडेंट और चापलूस लोगों को यह समझना चाहिए कि धार्मिक जगह पर दीया जलाना ही काफी है या मुस्लिम समुदाय के हक और इंसाफ़ के लिए आवाज़ उठाना भी ज़रूरी है?

इस तरह प्रधानमंत्री के नाम पर मज़ार पर दीया जलाने से मुस्लिम समुदाय की परेशानियां हल नहीं होतीं। बल्कि इस तरह मुस्लिम धार्मिक जगहों पर दीया जलाने से एक गलत परंपरा बनेगी और मुस्लिम समुदाय में गलत मैसेज जाएगा। ऐसा करने के बजाय, BJP के माइनॉरिटी फ्रंट से जुड़े लोगों को बेखौफ होकर रूलिंग पार्टी के माइनॉरिटी फ्रंट के साथ रोज़गार, शिक्षा, सरकारी नुमाइंदगी, सुरक्षा, एडमिनिस्ट्रेटिव इंसाफ़ और समान नागरिक अधिकारों, वोटर लिस्ट से मुसलमानों को बाहर रखने और दूसरे मामलों में हो रहे अन्याय पर सवाल उठाने चाहिए।

ये लोग ऐसा क्यों नहीं करते? अगर हमें इस्लामिक धार्मिक जगहों पर दीये जलाने हैं, तो हमें ऐसे अन्याय के विरोध में तोड़ी गई दरगाहों, मस्जिदों और हमारी दूसरी धार्मिक जगहों पर भी दीये जलाने चाहिए! इन सभी को यह बात समझ में क्यों नहीं आती?या डर लगता है!

अगर किसी सरकार, पार्टी या उससे जुड़े संगठनों पर किसी समुदाय विशेष पर अन्याय या भेदभाव के आरोप लगते हैं, तो उसकी जांच करना और जवाबदेही मांगना ही सच्ची समाज सेवा है। देश का माइनॉरिटी फ्रंट यह बात कब समझेगा? भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़े माइनॉरिटी मोर्चा के सभी नेताओं को समझाना पड़ेगा की मुस्लिम समुदाय इस तरह के सिर्फ सिंबॉलिक दीये नहीं, बल्कि बराबरी, सुरक्षा, सम्मान और न्याय चाहता है।

अगर इन लोगों में थोड़ी भी अक्ल बची हैं तो इनको अपने समुदाय पर हो रहे अत्याचार और अन्यायों के विरुद्ध खड़ा होना चाहिए और सरकार को सवाल करना चाहिए। किंतु ऐसा नहीं होता क्योंकि यह सभी लोग सरकार और सत्ताधीन लोगों के गाल बजाने के लिए ही रखे गए हैं। इन लोगों में ऐसी नैतिक हिम्मत कहां की उनके सामने आवाज़ उठाएं?

हम भी गुजरात के भारतीय जनता पार्टी के माइनॉरिटी मोर्चे की प्रदेश इकाई में 10 माह थे मगर उनके राज्य प्रमुख ने जब मुसलमानों के संदर्भ में अनाप-शनाप बका तो एक लंबा लेटर लिखकर हम इसे अलग हो गए थे। अल्लाह ने हमें हिदायत दी और समझ आया कि हम गलत लोगों के साथ थे, अन्याय और अत्याचार करने वालों के साथ में थे!

हमारे कोई मकसद को हासिल करने के लिए हम वहां नहीं थे।

हम देश के भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़े मुस्लिम समुदाय को यही बताना चाहते हैं कि दरगाहों पर रोशनी करें, लेकिन समाज के हक के लिए भी अपनी आवाज उठाएं।

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