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क्यों खास है BRICS? 4 देशों से 21 देशों तक का पूरा सफर

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 4 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
क्यों खास है BRICS? 4 देशों से 21 देशों तक का पूरा सफर

सितंबर 04, नई दिल्ली: ब्रिक्स पिछले करीब दो दशक में चार उभरती अर्थव्यवस्थाओं के आर्थिक मंच से बढ़कर 11 सदस्य देशों और 10 साझेदार देशों वाले व्यापक समूह में बदल गया है। इसका दायरा व्यापार और विकास से आगे बढ़कर वैश्विक शासन, वित्तीय व्यवस्था, तकनीक, ऊर्जा, जलवायु और ग्लोबल साउथ के मुद्दों तक पहुंच गया है।

ब्रिक्स की शुरुआत 2009 में ब्राजील, रूस, भारत और चीन के साथ हुई थी। 2011 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद इसका नाम BRIC से BRICS हो गया। 2023 के जोहान्सबर्ग सम्मेलन में पांच नए देशों को शामिल करने का फैसला हुआ, जिससे ब्रिक्स का भौगोलिक और रणनीतिक दायरा एशिया, अफ्रीका और पश्चिम एशिया तक फैल गया।

2024 के कज़ान सम्मेलन में ब्रिक्स ने Partner Country की नई श्रेणी शुरू की। इसके बाद पूर्ण सदस्यों के साथ साझेदार देशों का नेटवर्क भी विकसित हुआ। 2025 में इंडोनेशिया को पूर्ण सदस्य बनाया गया।

इसी अवधि में बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कज़ाख़स्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम साझेदार देश बने। 2024 में 30 से अधिक देशों ने ब्रिक्स के साथ जुड़ने में रुचि दिखाई थी। विस्तार के साथ ब्रिक्स एक सीमित समूह के बजाय व्यापक नेटवर्क का रूप लेता गया।

ब्रिक्स का कार्यक्षेत्र भी सदस्यता विस्तार के साथ बढ़ा है। आर्थिक सहयोग से आगे बढ़कर समूह बहुपक्षवाद, वैश्विक संस्थाओं में अधिक प्रतिनिधित्व और वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार जैसे मुद्दों पर चर्चा कर रहा है।

कज़ान घोषणा में बहुपक्षवाद और अधिक प्रतिनिधित्व वाली वैश्विक व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया गया। 2025 के रियो डी जेनेरियो सम्मेलन में ग्लोबल साउथ के सहयोग, जलवायु वित्त, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और वैश्विक शासन सुधार जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी गई। ब्रिक्स कोई औपचारिक सैन्य गठबंधन नहीं है।

इसका संधि-आधारित ढांचा, स्थायी सचिवालय या साझा बजट नहीं है और इसके फैसले आम तौर पर सर्वसम्मति से लिए जाते हैं। ब्रिक्स की ताकत सदस्य देशों के बीच समन्वय, सामूहिक आवाज़ और वैकल्पिक सहयोग के रास्ते तलाशने में है। 2026 में भारत ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है।

भारत की अध्यक्षता का केंद्रीय मंत्र संकट से निपटने की क्षमता, नवाचार, आपसी सहयोग और टिकाऊ विकास है। भारत की अध्यक्षता में मजबूत और भरोसेमंद सप्लाई चेन, ग्रीन एनर्जी, MSME, स्टार्टअप और नवाचार, डिजिटल सहयोग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, व्यापार में संतुलन और वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार पर जोर दिया जा रहा है।

हाल में हुए BRICS व्यापार मंत्रियों के सम्मेलन में भारत ने मजबूत और विविधतापूर्ण ग्लोबल वैल्यू चेन बनाने पर जोर दिया। साथ ही MSME को वित्तीय मदद देने और 2030 तक BRICS Economic Partnership Strategy को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

भारत की अध्यक्षता में देशभर में 350 से ज्यादा BRICS बैठकें और उच्चस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। ब्रिक्स का मौजूदा विस्तार इस सवाल को महत्वपूर्ण बनाता है कि ग्लोबल साउथ की सामूहिक ताकत को वैश्विक फैसलों पर अधिक प्रभाव डालने वाली शक्ति में कैसे बदला जा सकता है।

चार देशों से शुरू हुआ ब्रिक्स अब 11 सदस्यों और 10 साझेदार देशों का विस्तृत समूह है। भारत की अध्यक्षता में जोर इस विस्तार को व्यावहारिक सहयोग और परिणामों में बदलने पर है।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।