लगभग एक साल बाद भी इनर अखाड़ा बाजार में भूस्खलन का खतरा बरकरार, दहशत में लोग
अगस्त 17, कुल्लू (हिमाचल प्रदेश): कुल्लू के इनर अखाड़ा बाजार में सितंबर 2025 में हुए दो भूस्खलनों को करीब एक साल बीतने के बावजूद स्थानीय लोगों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र में अब भी कई बड़े पत्थर और मलबा खतरनाक स्थिति में लटके हुए हैं, जबकि स्थायी सुरक्षा उपाय शुरू नहीं होने से लोगों की जान-माल पर खतरा मंडरा रहा है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीम ने मौके का निरीक्षण किया। टीम ने इस बात पर चिंता जताई कि इतने समय बाद भी यहां सुरक्षा कार्य क्यों शुरू नहीं किए गए। टीम ने कहा कि वह अपनी रिपोर्ट तैयार कर दोबारा सरकार को भेजेगी, ताकि प्रभावित क्षेत्र में जल्द से जल्द आवश्यक कार्य शुरू हो सके। स्थानीय निवासी कंचन, नीलम, अंजू, सीता और प्रिया ने कहा कि लगभग एक साल बीतने के बावजूद भूस्खलन से बचाव के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी चिंता यह है कि पहाड़ी से नीचे गिरने की स्थिति में मौजूद बड़े-बड़े पत्थरों और मलबे को भी अभी तक नहीं हटाया गया है। बारिश के दौरान इनके गिरने का खतरा और बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों ने बताया कि हाल ही में भूस्खलन संभावित क्षेत्र में तिरपाल लगाए गए हैं, लेकिन इन्हें पूरी तरह से इस तरह नहीं बिछाया गया है कि पूरा संवेदनशील क्षेत्र ढका जा सके। बारिश के दौरान पानी के रिसाव और मिट्टी खिसकने की आशंका के बीच लोगों को रातभर जागकर रहना पड़ता है। वहीं, जल शक्ति विभाग के अधिकारियों का कहना है कि भूस्खलन को रोकने के लिए रिटेनिंग वॉल बनाने का प्रस्ताव प्रोजेक्ट असेसमेंट कमेटी (PAC) और टेक्निकल अप्रूवल कमेटी (TAC) से मंजूर हो चुका है। अधिकारियों के अनुसार, स्टेट अप्रूवल कमेटी (SAC) से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। अधिकारियों ने यह भी बताया कि मठ क्षेत्र में जल निकासी व्यवस्था की कमी को भूस्खलन के प्रमुख कारणों में से एक माना जा रहा है। मठ क्षेत्र में ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने के लिए एक अन्य परियोजना को भी PAC से मंजूरी मिल चुकी है और इसे आगे TAC के समक्ष भेजा जाएगा। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से दोनों कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शुरू करने की मांग की है। उनका कहना है कि इनर अखाड़ा बाजार घनी आबादी वाला क्षेत्र है और यहां किसी भी तरह की देरी जान-माल पर भारी पड़ सकती है। बारिश का मौसम दोबारा दस्तक दे चुका है और अस्थिर पहाड़ी अब भी घरों और अन्य संपत्तियों के ऊपर खतरा बनी हुई है। ऐसे में लोगों ने मांग की है कि लटके हुए पत्थरों और मलबे को तत्काल हटाया जाए, तिरपाल को पूरी तरह से बिछाया जाए तथा रिटेनिंग वॉल और मठ क्षेत्र की ड्रेनेज व्यवस्था का काम बिना किसी और देरी के शुरू किया जाए। इनर अखाड़ा बाजार के लोगों के लिए यह अब केवल विकास कार्य या प्रशासनिक मंजूरियों का मामला नहीं है, बल्कि उनकी सुरक्षा और जान-माल की रक्षा का सवाल है।