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लाहौल घाटी में बर्फबारी थमी, लेकिन ठंड का प्रकोप बढ़ा; सेब की फसल को भारी नुकसान

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 16 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
लाहौल घाटी में बर्फबारी थमी, लेकिन ठंड का प्रकोप बढ़ा; सेब की फसल को भारी नुकसान

जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति की लाहौल घाटी में बर्फबारी का सिलसिला थमने के बाद आज मौसम साफ हो गया है, लेकिन तापमान में भारी गिरावट के चलते घाटी में ठंड का प्रकोप बढ़ गया है। रात के समय तापमान माइनस तीन से पांच डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने से जनजीवन पर ठंड का असर साफ दिखाई देने लगा है। वहीं, अचानक हुई बर्फबारी ने बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। सेब से लदे पेड़ों को भारी नुकसान पहुंचने से बागवानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। दूसरी ओर, सड़क मार्गों पर फिसलन और संभावित जोखिम को देखते हुए जिला प्रशासन ने कई मार्गों पर वाहनों की आवाजाही एहतियातन बंद कर दी है।

लाहौल घाटी में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। हाल ही में हुई बर्फबारी के बाद शुक्रवार को मौसम साफ रहा, लेकिन ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ठंड का असर लगातार बढ़ रहा है। रात के समय पारा माइनस तीन से पांच डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

अचानक हुई बर्फबारी ने बागवानों को भी बड़ा झटका दिया है। सेब की फसल से लदे पेड़ों पर बर्फ गिरने के कारण पेड़ों और फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। इससे बागवानों की मेहनत पर पानी फिरने की आशंका है और उन्हें आर्थिक नुकसान की चिंता सताने लगी है।

उधर, मौसम के बदले मिजाज और सड़क मार्गों पर फिसलन को देखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं। दारचा-शिंकुला, दारचा-सरचू और बातल से कुंजम जोत की ओर वाहनों की आवाजाही फिलहाल बंद कर दी गई है।

जिला प्रशासन ने घाटी के भीतर भी सड़कों पर फिसलन को देखते हुए लोगों और पर्यटकों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे मौसम और सड़क की स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही यात्रा करें, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।