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लाहौल-स्पीति में शुरू हुआ ‘हिमालयन गोल्ड’ सीबकथॉर्न का तुड़ान

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 26 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
लाहौल-स्पीति में शुरू हुआ ‘हिमालयन गोल्ड’ सीबकथॉर्न का तुड़ान

अगस्त 09, लाहौल-स्पीति (हिमाचल प्रदेश): हिमालय के ठंडे रेगिस्तानी क्षेत्रों का अनमोल प्राकृतिक खजाना और "हिमालयन गोल्ड" के नाम से प्रसिद्ध सीबकथॉर्न अब फल तुड़ान के मौसम में प्रवेश कर चुका है। लद्दाख के साथ लाहौल-स्पीति की घाटियों और नदी किनारों पर इसके चमकीले नारंगी और पीले फल पककर तैयार हैं।

सीबकथॉर्न को ‘एक जिला एक उत्पाद’ यानी ओडीओपी के तहत भी महत्वपूर्ण उत्पाद के रूप में पहचान मिली है। इसके फलों से रस, शरबत, तेल और चूर्ण जैसे मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार किए जाते हैं। कांटों से भरे इस पौधे की तुड़ाई आसान नहीं होती, लेकिन यह स्थानीय लोगों के लिए अतिरिक्त आय और स्वरोजगार की नई संभावनाएं खोल रहा है।

साथ ही इसकी जड़ें मिट्टी को बांधने और नदी किनारों के कटाव को रोकने में भी सहायक हैं। स्वास्थ्य, पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था-तीनों के लिए सीबकथॉर्न अब लाहौल-स्पीति में समृद्धि की नई उम्मीद बनकर उभर रहा है।लाहौल-स्पीति में शुरू हुआ ‘हिमालयन गोल्ड’ सीबकथॉर्न का तुड़ान

💡 पृष्ठभूमि (Background)

सीबकथॉर्न, जिसे "हिमालयन गोल्ड" भी कहा जाता है, लाहौल-स्पीति में फल तुड़ान के मौसम में प्रवेश कर चुका है। यह पौधा हिमाचल प्रदेश के ठंडे रेगिस्तानी क्षेत्रों में पाया जाता है और अपने चमकीले नारंगी-पीले फलों के लिए प्रसिद्ध है। इस खबर का महत्व यह है कि सीबकथॉर्न को "एक जिला एक उत्पाद" (ODOP) के तहत एक प्रमुख उत्पाद के रूप में मान्यता मिली है, जिससे स्थानीय किसानों को आर्थिक लाभ और क्षेत्रीय पहचान मिलेगी। आम जनता के लिए इसका असर यह है कि इस फल से बने खाद्य पदार्थों और दवाओं की उपलब्धता बढ़ेगी, जिसस

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।