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लखनऊ में AI से बना बप्पा का पंडाल:पेपर मिल कॉलोनी में कलश के रूप में सजा पंडाल, 10 दिन में 2 लाख लोग करते हैं दर्शन

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 11 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
लखनऊ में AI से बना बप्पा का पंडाल:पेपर मिल कॉलोनी में कलश के रूप में सजा पंडाल, 10 दिन में 2 लाख लोग करते हैं दर्शन

लखनऊ में गणेश चतुर्थी शुरू होते ही चारों ओर गणपति की धूम है। 'गणपति बप्पा मोरया मंगल मूर्ति मोरया' के जयकारों से पंडाल गूंज रहा है। रविवार देर रात निशातगंज स्थित पेपर मिल कॉलोनी में बप्पा विराजमान हो गए। कलश के आकार में भव्य पंडाल बनाया गया। पंडाल में गणपति के दर्शन करने के लिए पहले से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।

पर्दा हटाने से पहले आधे घंटे तक आतिशबाजी हुई उसके बाद जब पूरा माहौल भक्ति में हो गया तो पहली बार बप्पा के दर्शन लोगों ने किया। कलकत्ता के कारीगरों ने तैयार किया पंडाल आयोजकों में शामिल प्रतीक सिन्हा ने बताया कि अक्षय समिति नाम की संस्था है जो इस पूरे उत्सव का आयोजन करती है। इस पंडाल को तैयार करने में पूरे 22 दिन लगे।इसे तैयार करने के लिए कोलकाता से आए 8 कारीगरों ने दिन रात काम किया।

हम जैसा चाहते थे इस पंडाल को ठीक वैसे ही कलश का रूप मिला। हर साल हमारे प्रयास होता है कि सनातन धर्म से जुड़े हुए निशानी को पंडाल का रूप दिया जाए। AI कि मदद से बन पंडाल इस बार जब हम लोग बैठकर मंथन कर रहे थे तो कलश का आकार हम लोगों के विचार में आया। मगर उसके बाद समस्या यह हो रही थी कि हम जैसा कलश चाह रहे थे उसका डिजाइन नहीं बन पा रहा था।

फिर हमने AI कि मदद से कलश वाले पंडाल को डिजाइन किया। AI का अगर सकारात्मक इस्तेमाल किया जाए तो यह हमारे लिए बहुत मददगार है और इस पंडाल को बनाने में यह साबित हुआ कि वाकई AI बहुत मददगार है । तो इस 45 फीट लंबे और 45 फीट चौड़े कलश पंडाल को बनाने में AI की भूमिका अहम रही। 16 वर्षों से सज रहा है पंडाल आलोक आचार्य ने बताया कि पिछले 16 वर्षों से लगातार यहां गणेश चतुर्थी का पंडाल सजा रहा है ।

पिछले साल शिवलिंग के आकार में हमने पंडाल को सजाया था इस बार कलश का आलार दिया है। 14 सितम्बर से लेकर 23 सितंबर तक 10 दिनों तक भव्य मेला लगेगा। इसके अलावा हर दिन विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं जिसमें कॉलोनी के लोग बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं। प्रतिदिन 20 हजार लोग करते हैं दर्शन अरुण टंडन ने कहा कि यह हम लोगों का सौभाग्य है कि गणपति जी ने हमें अपनी पूजा करने के लिए चुना।

प्रतिदिन लगभग 20 हजार लोग आते हैं। अगर 10 दिनों की बात करें तो 2 लाख से अधिक लोगों का आगमन होता है। पूरे उत्सव की की भव्यता और भीड़ को देखते हुए हमें बात कह सकते हैं कि बिना स्थानीय लोगों के भरपूर सहयोग के यह काम संभव नहीं है।

📡 स्रोत: NewsData.io

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