लखनऊ में ‘कथा एक कंस की’ नाटक:सत्ता के अहंकार और मानवीय द्वंद्व को दिखाया गया, रबींद्रालय प्रेक्षागृह में मंचन
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →चारबाग स्थित रवींद्रालय प्रेक्षागृह में नाटक ‘कथा एक कंस की’ का मंचन किया गया। संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से नाट्य संस्था भरत रंग लखनऊ की ओर से यह प्रस्तुति दी गई। पौराणिक कथा पर आधारित नाटक ने दर्शकों को सत्ता, अहंकार और महत्वाकांक्षा के संघर्ष कों दिखाया। नाटक में प्रेम और नियति के बीच के द्वंद्व को भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया।
मंचन के दौरान कलाकारों के अभिनय और संवादों ने दर्शकों को बांधे रखा। कथा के जरिए सत्ता के साथ बढ़ते अहंकार और उसके परिणामों को सामने रखा गया। कलाकारों ने दमदार अभिनय किया प्रसिद्ध नाटककार दया प्रकाश सिन्हा के चर्चित नाटक का निर्देशन चन्द्रभाष सिंह ने किया। मंच पर कंस को सिर्फ अत्याचारी शासक के रूप में नहीं, बल्कि असुरक्षा, मानसिक द्वंद्व और सत्ता की महत्वाकांक्षा से जूझते एक मनुष्य के रूप में दिखाया गया ।
नाटक के दौरान अभिनय, प्रकाश, संगीत और मंच संयोजन का प्रभावी तालमेल देखने को मिला। कलाकारों के सशक्त अभिनय ने कहानी को जीवंत कर दिया। खासकर कंस के चरित्र की भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक परतों को दर्शकों ने खूब सराहा। नाटक दर्शकों को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करता है निर्देशक चन्द्रभाष सिंह ने कहा कि नाटक का उद्देश्य केवल पौराणिक कथा को दोहराना नहीं है।
कंस के माध्यम से सत्ता और मनुष्य के बीच के संबंध को वर्तमान परिस्थितियों में दिखाने का प्रयास किया गया है। रंगमंच समाज के सामने सवाल खड़े करने का सशक्त माध्यम है और यह नाटक दर्शकों को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करता है। मंचन में गिन्नी सहगल, मुस्कान सोनी, अनामिका, लावण्या बाजपेई, रजनीश कुमार समेत करीब 30 कलाकारों ने अभिनय किया।
📡 स्रोत: NewsData.io