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लखनऊ प्राणि उद्यान में वन्य प्राणी सप्ताह 2026 का समापन:प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने इंडोर वार्ड का लोकार्पण किया, छात्र-छात्राएं शामिल हुए

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 11 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
लखनऊ प्राणि उद्यान में वन्य प्राणी सप्ताह 2026 का समापन:प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने इंडोर वार्ड का लोकार्पण किया, छात्र-छात्राएं शामिल हुए

लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान में गुरुवार कों राज्य स्तरीय वन्य प्राणी सप्ताह 2026 का समापन हो गया। मुख्य अतिथि प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष सुनील चौधरी और विशिष्ट अतिथि प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन्य जीव अनुराधा वेमुरी ने समारोह का शुभारंभ किया। इस दौरान वन विभाग, प्राणि उद्यान के अधिकारी-कर्मचारी और विभिन्न स्कूलों के छात्र-छात्राएं शामिल हुए।

समारोह से पहले मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि ने निदेशक संजय कुमार बिश्वाल के नेतृत्व में प्राणि उद्यान के वन्य जीव चिकित्सालय में इंडोर वार्ड के विस्तारीकरण का लोकार्पण किया। सात दिन चिड़ियाघर बना पाठशाला निदेशक संजय कुमार बिश्वाल ने कहा कि 2 से 8 अक्टूबर तक चले वन्य प्राणी सप्ताह में प्राणि उद्यान ने सिर्फ चिड़ियाघर की भूमिका नहीं निभाई, बल्कि एक पाठशाला के रूप में भी काम किया।

इस दौरान नेचर वॉक, चित्रकला प्रतियोगिता, वन्य जीव वार्ता और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें लखनऊवासियों और स्कूली छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि बनारसीबाग में 1921 में शुरू हुआ। यह प्राणि उद्यान आज 1000 से अधिक वन्य जीवों का संरक्षण कर रहा है। बारासिंघा के सफल प्रजनन, गिद्ध संरक्षण परियोजना और अत्याधुनिक पशु चिकित्सालय जैसे प्रयास वन्यजीव संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

दुधवा में सुरक्षित बाघ देखना असली जीत बिश्वाल ने कहा कि संरक्षण की असली सफलता तब होगी, जब बच्चे बाघ को सिर्फ चिड़ियाघर में नहीं, बल्कि दुधवा के जंगलों में सुरक्षित देख सकें। गोमती नदी और आर्द्रभूमियां स्वच्छ हों और हर सर्दी में प्रवासी पक्षी यहां लौटें। उन्होंने वन्य प्राणी सप्ताह को सफल बनाने के लिए स्कूलों, छात्रों, शिक्षकों और प्राणि उद्यान के अधिकारियों-कर्मचारियों का आभार जताया।

कहा कि 365 दिन बिना छुट्टी वन्यजीवों की सेवा करने वाले कीपर्स और कर्मचारी ही उद्यान के असली नायक हैं। उन्होंने अपील की कि वन्य प्राणी सप्ताह को सिर्फ सात दिनों तक सीमित न रखकर इसे जीवनशैली बनाया जाए।

📡 स्रोत: NewsData.io

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