लखनऊ में तहबीब फाउंडेशन की काव्य संध्या:शायरों ने अपनी गज़लों से बांधा समां, अगले महीने होगा 'लिटरेरी फ़ेस्टिवल'
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →लखनऊ के हजरतगंज स्थित रॉयल कैफ़े में साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं तहज़ीबी कार्यक्रमों के लिए वैश्विक स्तर पर पहचान रखने वाली संस्था 'तहबीब' की ओर से एक भव्य काव्य संध्या का आयोजन किया गया। यह विशेष महफ़िल संस्था के आयोजक, प्रसिद्ध बुद्धिजीवी एवं पत्रकार तारिक़ फ़ैज़ी के लखनऊ आगमन के उपलक्ष्य में सजाई गई थी। कार्यक्रम में देश के कई शहरों से आए नामचीन रचनाकारों ने शिरकत कर अपनी बेहतरीन शायरी से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम की मेज़बानी प्रसिद्ध लेखिका व शायरा माह-ए-तलअत सिद्दीक़ी ने की। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शायर डॉ.
तारिक़ क़मर ने इस काव्य संध्या की अध्यक्षता की, जबकि संचालन प्रसिद्ध शायर एवं पत्रकार मुईन अलवी ने अपने विशिष्ट और मँजे हुए अंदाज़ में किया। महफ़िल में लखनऊ के अलावा दिल्ली, रायबरेली, आज़मगढ़ और कानपुर से आए डॉ.
तारिक़ क़मर, शाहिद कमाल, मुईन अलवी, डॉ.
अहमद अयाज़, तारा इक़बाल, उफ़क़ आज़मी समेत कई रचनाकारों ने अपने उम्दा कलाम पेश किए। काव्य पाठ के दौरान "दलील पुख़्ता न थी, मोतबर हवाला न था। चराग़ जल तो रहे थे मगर उजाला न था..." जैसी पंक्तियों ने खूब तालियां बटोरीं। जब तक काबिल शायर मौजूद, अदबी भविष्य महफूज़ समारोह में विशेष वक्ता के रूप में बोलते हुए तारिक़ फ़ैज़ी ने कहा कि 'तहबीब' हमेशा साहित्यिक गरिमा और उच्च गुणवत्ता के मानकों को प्राथमिकता देती आई है। बदलते दौर की शायरी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब तक डॉ.
तारिक़ क़मर जैसे इल्मी योग्यता और सुदृढ़ चरित्र वाले शायर मौजूद हैं, तब तक अदबी भविष्य को लेकर मायूस होने की आवश्यकता नहीं है। इस अवसर पर आयोजकों द्वारा आगामी माह लखनऊ में 'लिटरेरी फ़ेस्टिवल' आयोजित करने की महत्वपूर्ण घोषणा भी की गई। महफ़िल में आतिफ़ ख़ान, निख़त परवीन, सबाहत आफ़रीन, अलहमरा ख़ान सहित अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। अंत में माह-ए-तलअत सिद्दीक़ी ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया, जिसके पश्चात रात्रिभोज के साथ इस शानदार आयोजन का समापन हुआ।
📡 स्रोत: NewsData.io