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ललितपुर के पास अनूठी अष्टादशभुजा गणेश प्रतिमा, आस्था के साथ पुरातत्व का भी खास केंद्र

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 26 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
ललितपुर के पास अनूठी अष्टादशभुजा गणेश प्रतिमा, आस्था के साथ पुरातत्व का भी खास केंद्र

ललितपुर जिले में बानपुर के पास भगवान गणेश की एक अनूठी प्रतिमा मौजूद है, जो आस्था के साथ-साथ पुरातत्व की दृष्टि से भी विशेष महत्व रखती है। अठारह भुजाओं वाली गणेश जी की यह प्रतिमा अपनी तरह की अनोखी प्रतिमाओं में मानी जाती है। टीकमगढ़ से करीब 13 किलोमीटर दूर स्थित गणेशपुरा को पुरातत्व विभाग द्वारा गणेशखेड़ा के नाम से जाना जाता है।

जंगल के बीच स्थित यह क्षेत्र आज भी प्राचीन धरोहर को संजोए हुए है। यहां मौजूद अठारह भुजाओं वाली गणेश प्रतिमा श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र होने के साथ इतिहास और पुरातत्व में रुचि रखने वाले लोगों के लिए भी आकर्षण का विषय है। प्राचीन प्रतिमा की विशिष्ट बनावट और ऐतिहासिक महत्व इसे क्षेत्र की महत्वपूर्ण धरोहरों में शामिल करता है।

जंगल के बीच स्थित इस स्थल पर प्राचीन विरासत के संरक्षण की झलक भी देखने को मिलती है।

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बानपुर के पास जंगल में मौजूद है प्राचीन गणेश प्रतिमा

अठारह भुजाओं वाली गणेश प्रतिमा की अलग पहचान

टीकमगढ़ से करीब 13 किलोमीटर दूर स्थित है गणेशपुरा

पुरातत्व विभाग के रिकॉर्ड में गणेशखेड़ा के नाम से जाना जाता है क्षेत्र

आस्था के साथ इतिहास और पुरातत्व में भी विशेष महत्व

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।