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लंका दहन के साथ अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा संपन्न, भगवान रघुनाथ लौटे अपने मंदिर

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 28 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
लंका दहन के साथ अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा संपन्न, भगवान रघुनाथ लौटे अपने मंदिर

कुल्लू। जिला कुल्लू के मुख्यालय ढालपुर मैदान में सात दिनों तक चले अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव का मंगलवार को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ समापन हो गया। दोपहर बाद भगवान रघुनाथ की रथ यात्रा निकाली गई, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। लंका दहन की परंपरा के निर्वहन के बाद भगवान रघुनाथ का रथ वापस ढालपुर स्थित रथ मैदान पहुंचा। इसके बाद भगवान रघुनाथ, माता सीता और हनुमान की मूर्तियों को पालकी में विराजमान कर ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच रघुनाथ मंदिर ले जाया गया। सात दिनों तक ढालपुर में अस्थायी शिविर में विराजमान रहने के बाद भगवान रघुनाथ एक बार फिर अपने स्थायी मंदिर में विराजमान हो गए।

मंगलवार को भगवान रघुनाथ की रथ यात्रा के दौरान ढालपुर मैदान में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। हजारों लोगों ने भगवान रघुनाथ का रथ खींचते हुए उसे लंका बेकर की ओर पहुंचाया, जहां सदियों से चली आ रही देव परंपराओं का निर्वहन किया गया। इस दौरान माता हिडिंबा सहित अन्य देवी-देवता भी विशेष रूप से शामिल हुए।

लंका बेकर में अष्टांग बलि की परंपरा पूरी की गई।कुल्लू दशहरा में माता हिडिंबा की भूमिका विशेष मानी जाती है। माता सात दिनों तक ढालपुर में अपने अस्थायी शिविर में विराजमान रहती हैं और लंका दहन की परंपरा पूरी होने के बाद ही अपने देवालय लौटती हैं। लंका दहन के लिए निकलने वाली रथ यात्रा में माता हिडिंबा का रथ सबसे आगे चलता है।

अष्टांग बलि की प्रक्रिया के दौरान माता के गूर, पुजारी, घंटी और धड़च्छ निर्धारित परंपराओं के अनुसार शामिल होते हैं, जबकि माता का रथ कुछ दूरी पर रहता है। बलि की प्रक्रिया पूरी होते ही माता का रथ पीछे मुड़कर अपने देवालय की ओर लौट जाता है। इसी के साथ दशहरा उत्सव के समापन की परंपरा पूरी होती है।

लंका दहन की परंपरा पूरी होने के बाद भगवान रघुनाथ का रथ वापस ढालपुर के रथ मैदान पहुंचा। यहां भगवान रघुनाथ, माता सीता और हनुमान की मूर्तियों को पालकी में सजाया गया और श्रद्धालुओं की मौजूदगी में रघुनाथ मंदिर ले जाया गया। भगवान रघुनाथ के मंदिर लौटने के साथ ही सात दिवसीय उत्सव का समापन हो गया।अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा के दौरान ढालपुर में पहुंचे सैकड़ों देवी-देवता भी अपने अस्थायी शिविरों से विदाई लेकर अपने-अपने देवालयों की ओर लौटने लगे हैं।

मंगलवार को भी देवी-देवताओं के बीच पारंपरिक देव मिलन की प्रक्रिया निभाई गई। श्रद्धालुओं ने देवी-देवताओं से आशीर्वाद लिया और अगले वर्ष फिर दशहरा उत्सव में मिलने की कामना की।

सात दिनों तक देवी-देवताओं की मौजूदगी, देव मिलन और धार्मिक अनुष्ठानों से गुलजार रहने वाला ढालपुर मैदान अब एक बार फिर सूना हो गया है। अगले वर्ष अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के दौरान यहां फिर सैकड़ों देवी-देवताओं का भव्य देव महाकुंभ देखने को मिलेगा।भगवान रघुनाथ की रथ यात्रा देखने पहुंचे श्रद्धालु अश्वनी महंत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा ऐसा अनूठा उत्सव है, जहां एक ही मैदान में जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से आए देवी-देवताओं के दर्शन करने का अवसर मिलता है।

भगवान रघुनाथ की रथ यात्रा के साथ उत्सव संपन्न हो गया है। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष वह फिर ढालपुर मैदान में आकर देवी-देवताओं के दर्शन करेंगे।

रथ यात्रा में शामिल सिद्धार्थ पुरोहित ने कहा कि भगवान रघुनाथ सात दिनों तक ढालपुर में अपने अस्थायी शिविर में विराजमान रहे। लंका दहन की परंपरा पूरी होने के बाद अब वह अपने स्थायी मंदिर लौट गए हैं। उन्होंने बताया कि हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान रघुनाथ का रथ खींचकर उनका आशीर्वाद लिया।भूपेंद्र वर्मा ने कहा कि लंका दहन के साथ भगवान रघुनाथ अपने देवालय लौट गए हैं। वह हर वर्ष दशहरा उत्सव के दौरान भगवान रघुनाथ को मंदिर से लाने और वापस मंदिर पहुंचाने की यात्रा में शामिल रहते हैं। उनके अनुसार, भगवान रघुनाथ की विदाई का यह क्षण श्रद्धालुओं के लिए भावुक होता है।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।