लंका दहन से पहले भगवान रघुनाथ के दरबार में मां त्रिपुरा सुंदरी की विशेष पूजा-अर्चना
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कुल्लू: अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में लंका दहन से पहले भगवान रघुनाथ के दरबार में विशेष धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया गया। इस दौरान जहां ढालपुर स्थित भगवान रघुनाथ के अस्थायी शिविर में सैकड़ों देवी-देवताओं ने हाजिरी भरी, वहीं रघुनाथ मंदिर में भी विशेष पूजा-अर्चना की गई। इस अवसर पर मंदिर के अस्थायी शिविर में पारंपरिक चंद्रौनी नृत्य का आयोजन हुआ और देवी भगवती ने श्रद्धालुओं को दर्शन दिए।
भगवान रघुनाथ के करदार दानवेंद्र सिंह ने बताया कि लंका दहन से पहले भगवान रघुनाथ के दरबार में देवी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस दौरान राजपरिवार की कुलदेवी मां त्रिपुरा सुंदरी का आह्वान किया जाता है। परंपरा के अनुसार, शेर पर सवार होकर देवी भगवती सबसे पहले भगवान रघुनाथ के अस्थायी शिविर में दर्शन देती हैं। इसके बाद राजा की चाननी में भी देवी भगवती के दर्शन होते हैं।
उन्होंने बताया कि इस पूरी धार्मिक प्रक्रिया के दौरान भगवान रघुनाथ देवी की आराधना करते हैं और लंका दहन की परंपरा के निर्वहन के लिए शक्तियां अर्जित करते हैं। कुल्लू दशहरा की यह प्राचीन देव परंपरा उत्सव के धार्मिक महत्व को दर्शाती है।देवी भगवती के दर्शन और विशेष पूजा-अर्चना के इस पावन अवसर को देखने के लिए मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। लोगों ने देव परंपराओं के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। कुल्लू दशहरा में निभाई जाने वाली ये परंपराएं हिमाचल प्रदेश की समृद्ध देव संस्कृति और आस्था की अनूठी झलक पेश करती हैं।