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लश्कर कमांडर मूसा घावों पर लगाता था आयुर्वेदिक शहद:सेहत की जानकारी देने पाकिस्तानी हैंडलर को तस्वीरें भेजीं; मुशर्रफ की सिक्योरिटी में रह चुका था

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 4 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
लश्कर कमांडर मूसा घावों पर लगाता था आयुर्वेदिक शहद:सेहत की जानकारी देने पाकिस्तानी हैंडलर को तस्वीरें भेजीं; मुशर्रफ की सिक्योरिटी में रह चुका था

जम्मू-कश्मीर के यूसमर्ग में मारा गया लश्कर-ए-तैयबा का कमांडर मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा जंगल में गोली के घावों पर शहद लगाता था। अधिकारियों के मुताबिक, वह घाव जल्दी भरने और संक्रमण रोकने के लिए यह तरीका अपनाता था। मूसा को 4 दिन पहले मध्य कश्मीर के बडगाम जिले के यूसमर्ग में सेना ने मार गिराया।

वह जम्मू-कश्मीर में प्रतिबंधित लश्कर का मुख्य ऑपरेशनल कमांडर और 2025 के पहलगाम आतंकी हमले में शामिल था। अधिकारियों के मुताबिक, मूसा को राजौरी के डोरिमल-गंभीर मुगला इलाके में ऑपरेशन शेरुवाली के दौरान गोली लगी थी। दो आतंकियों की तलाश में यह ऑपरेशन 45 दिनों से ज्यादा चला था। मूसा और उसका साथी यासिर पुंछ-राजौरी के जंगलों में छिपे थे।

सुरक्षा घेरा होने के कारण मूसा को इलाज नहीं मिल पा रहा था, इसलिए उसने घावों पर शहद लगाया। यासिर सितंबर के पहले हफ्ते में यूसमर्ग के ऊंचाई वाले इलाके में मारा गया था। उसके पास से मिले फोन में मूसा के शहद से उपचार किए गए घावों की तस्वीरें मिलीं। अधिकारियों ने बताया कि ये तस्वीरें सीमा पार पाकिस्तान में मौजूद हैंडलरों को भेजी गई थीं।

इससे उन्हें मूसा की सेहत की जानकारी दी गई थी। हैंडलर यह निर्देश दे रहे थे कि शहद शुद्ध होना चाहिए। उनका मानना था कि इससे मूसा के घाव जल्दी भरने में मदद मिलेगी। अधिकारियों के मुताबिक, मूसा करीब एक दर्जन आतंकी हमलों में शामिल था। इनमें 2025 का पहलगाम हमला भी शामिल है। बैसरन के मैदानों में हुए इस हमले में 26 लोग मारे गए थे।

इनमें ज्यादातर पर्यटक थे। आयुर्वेद में शहद से घाव का इलाज मेडिकल एक्सपर्ट्स ने कहा कि जंगल में मूसा का यह तरीका घावों के इलाज से जुड़े पुराने आयुर्वेदिक सिद्धांतों पर आधारित था। ऑल इंडिया डॉक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन के अध्यक्ष डॉ.

आरपी पाराशर ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद में सुश्रुत संहिता जैसे ग्रंथों में घाव की देखभाल के लिए शहद का इस्तेमाल बताया गया है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद में इसे व्रण चिकित्सा कहा जाता है। इसमें शहद के शोधन यानी सफाई और रोपण यानी घाव भरने वाले गुणों का इस्तेमाल होता है। डॉ.

पाराशर ने कहा, “आधुनिक रिसर्च से इन बातों की संभावित वजहें समझ आती हैं। शहद की ज्यादा ऑस्मोटिक एक्टिविटी, एसिडिक pH और कुछ तरह के शहद में हाइड्रोजन पेरोक्साइड बनना शामिल है।”

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

यह खबर जम्मू‑कश्मीर के लश्कर‑ए‑तैयबा के कमांडर मोहम्मद आसिफ ‘हाशिम मूसा’ के बारे में है, जो गोली के घावों पर आयुर्वेदिक शहद लगाकर उपचार करता था। यह घटना 2025 के पहलगाम के आतंकवादी हमले के बाद, 4 दिन पहले बडगाम जिले के यूसमर्ग में सेना द्वारा उसे मार गिराने के बाद सामने आई। यह विषय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाता है कि आतंकवादी समूह भी पारंपरिक उपचार विधियों का सहारा लेते हैं, जिससे उनके कार्यों के प्रति समाज में जिज्ञासा और चिंता बढ़ती है। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि लोग आतंकवाद क

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