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लेबल पर फंसा पेंच! जिस Old Monk को असली समझकर पी रहे थे, उस पर FSSAI ने उठाए सवाल

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 24 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
लेबल पर फंसा पेंच! जिस Old Monk को असली समझकर पी रहे थे, उस पर FSSAI ने उठाए सवाल

Old Monk Case: अगर आप भी ओल्ड मोंक के दीवाने हैं, तो यह खबर आपके दिल की धड़कनें तेज कर सकती है। महाराष्ट्र में ओल्ड मोंक की बिक्री पर FSSAI द्वारा लगाई गई रोक के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है। गुरुवार को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने अदालत में ऐसा तर्क दिया, जिसने सब कुछ हिलाकर रख दिया।

FSSAI का सीधा कहना है कि न्यूट्रल स्पिरिट्स में बाहर से रम का फ्लेवर मिलाकर बेचे जाने वाले प्रोडक्ट को रम कहा ही नहीं जा सकता। मामला महाराष्ट्र में FSSAI द्वारा ओल्ड मोंक की बिक्री पर बैन लगाने से शुरू हुआ। FSSAI का आरोप है कि इसमें बाहर से आर्टिफिशियल रम फ्लेवर डाला जाता है और बोतल पर ‘फ्लेवर्ड रम’ जैसा कोई स्पष्ट लेबल नहीं होता।

इसके खिलाफ ओल्ड मोंक बनाने वाली कंपनी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। FSSAI के वकील ने कोर्ट में साफ कहा, “न्यूट्रल स्पिरिट में सिर्फ फ्लेवर डालकर आप इसे रम नहीं कह सकते। यह असली रम की नकल कर रहा है।” कंपनी ने बोतल के लेबल बदलने का दिया ऑफर मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने तुरंत राहत देने से इनकार कर दिया था।

इसके बाद कंपनी बैकफुट पर आई और उसने अपनी पैकेजिंग में बदलाव करने की बात मानी। कंपनी ने नया लेबल सबमिट करते हुए बोतल पर “एड फ्लेवर” (जोड़ा गया स्वाद) प्रमुखता से लिखने और “7 Years Old Blended” जैसे दावों को हटाने का प्रस्ताव रखा। हालांकि, FSSAI ने इस नए लेबल पर भी आपत्ति जताई और कहा कि सिर्फ लेबल बदलने से प्रोडक्ट की बेसिक क्वालिटी और पहचान नहीं बदल जाती।

कंपनी को करोड़ों का नुकसान का डर कंपनी की तरफ से पेश हुए सीनियर वकील ने दलील दी कि वो एग्रिकल्चरल ओरिजिन के रेक्टिफाइड और न्यूट्रल स्पिरिट से नियमों के मुताबिक ही रम बना रहे हैं। उन्होंने अंतरिम राहत मांगते हुए कहा कि बैन की वजह से कंपनी को करोड़ों रुपये का भारी नुकसान हो रहा है। इस पर एक्टिंग चीफ जस्टिस की बेंच ने तल्ख रुख अपनाते हुए कहा कि अगर अभी बिना अंतिम फैसले के स्टॉक बेचने की अनुमति दे दी गई और बाद में यह गलत साबित हुआ, तो क्या होगा?

फिलहाल कोर्ट ने अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है और मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर के लिए टाल दी है।

📡 स्रोत: NewsData.io

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