लिंक एक्सप्रेस वे पर संभल कर चलें:गोरखपुर की ओर आने वाली लेन पर कई गड्ढे; ध्यान नहीं दिया तो उछल जाएगी गाड़ी
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →बरसात में प्रदेश की गई सड़कों में गड्ढे दिखाई देने लगे हैं। गोरखपुर को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाले लिंक एक्सप्रेस वे की डाउन लेन यानी जिस लेन से आप गोरखपुर की ओर आते हैं, उसपर कई गड्ढे हैं। गड्ढे भी ऐसे की ध्यान नहीं दिया तो तेज गति से आ रही आपकी गाड़ी उछल सकती है। सबसे खतरनाक गड्ढे लिंक एक्सप्रेस वे के दूसरे हिस्से में हैं।
यह हिस्सा सरयू नदी के पार पड़ता है। सरयू नदी से गोरखपुर के बीच भी कई जगह छोटे गड्ढे नजर आ रहे हैं, जिसकी ओर एक्सप्रेस वे अथारिटी का ध्यान नहीं है। इस लिंक एक्सप्रेस वे का लोकार्पण हुए 1 साल से अधिक समय बीत चुका है। लोकार्पण 20 जून 2025 को हुआ था और इसी बरसात में डाउन लेन खराब हो गई थी।
यहां सड़क में एक गाड़ी का पहिया धंस गया था। यह खराबी भी सरयू नदी के उस पार हुई थी यानी लिंक एक्सप्रेस वे के दूसरे हिस्से में। लगभग 90 किलोमीटर इस एक्सप्रेस वे को दो हिस्सों में बांटकर निर्माण किया गया था। पहला हिस्सा गोरखपुर के जैतपुर से अंबेडकरनगर के फुलवरिया तक लगभग 48 किलोमीटर का है।
इसका निर्माण APCO इंफ्राटेक द्वारा किया गया। जबकि दूसरा हिस्सा फुलवरिया से आजमगढ़ के सलारपुर तक है। 43 किलोमीटर लंबे इस हिस्से का निर्माण दिलीप बिल्डकॉन ने किया है। दूसरे हिस्से में ज्यादा दिक्कत सालारपुर से गोरखपुर की ओर आते समय लिंक एक्सप्रेसवे के दूसरे हिस्से में ज्यादा दिक्कत दिखाई देती है।
वहां कई जगह गड्ढे बन गए हैं। यदि यहां तेज गति से कोई गाड़ी लेकर आया तो दुर्घटना भी हो सकती है। कुछ दिन पहले तक यहां पैचिंग की काम किया गया लेकिन वह भी काम चलाऊ ही नजर आ रहा है। अब बात करें दूसरे हिस्से की तो यहां भी कुछ दूरी तक छोटे-छोटे गड्ढे नजर आ रहे हैं। इन गड्ढों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कभी भी इनसे खतरा हो सकता है। इन गड्ढों की ओर किसी जिम्मेदार की नजर भी नहीं जा रही।
📡 स्रोत: NewsData.io
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
सड़कों की सुरक्षा सिर्फ इन्फ्रास्ट्रक्चर पर नहीं, बल्कि हमारी सतर्कता पर भी निर्भर करती है। बारिश में गड्ढों से बचने के लिए धीमी गति से चलें, हेलमेट और सीट बेल्ट पहनें, और यदि रास्ते में खतरा दिखे तो तुरंत रिपोर्ट करें। दुर्घटना से बचाव के लिए सामूहिक जिम्मेदारी अपनाएँ, जिससे परिवारों को अनावश्यक दर्द न हो। सुरक्षित यात्रा, सुरक्षित समाज—हम सबकी जिम्मेदारी है।