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लोक आस्था और प्रकृति पूजन का पर्व ‘लोक पर्व दुबड़ी’ उत्साह के साथ मनाया गया

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 7 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
लोक आस्था और प्रकृति पूजन का पर्व ‘लोक पर्व दुबड़ी’ उत्साह के साथ मनाया गया

06 सितम्बर 2026, टिहरी गढ़वाल: टिहरी गढ़वाल के जौनपुर क्षेत्र में लोक आस्था और प्रकृति पूजन का पर्व लोक पर्व दुबड़ी पर्व पूरे उत्साह के साथ मनाया गया। नैनबाग के अंतर्गत ग्राम मौगी पाब में आयोजित दुबड़ी पर्व में अपर जिलाधिकारी शैलेन्द्र सिंह नेगी ने प्रतिभाग कर ग्रामीणों के साथ प्रकृति पूजन एवं लोक परंपराओं में सहभागिता की। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र की समृद्ध लोक संस्कृति, रीति-रिवाज और प्रकृति के प्रति ग्रामीणों की आस्था को करीब से जाना।

दुबड़ी लोक पर्व में प्रकृति पूजन की अनूठी परंपरा निभाई जाती है। पर्व के अवसर पर ग्रामीण सार्वजनिक स्थान पंचायत चौक पर एकत्रित होकर एक बड़ा डंडा गाड़ते हैं। इसके बाद ग्रामीण अपने खेतों में उगाई जा रही नई फसल एवं करीब 12 प्रकार के अनाजों के पौधों की पत्तियां लेकर आते हैं और उन्हें डंडे के चारों ओर सजाया जाता है। इस प्रकार फसल-पत्तियों से सजाए गए डंडे को ‘दुबड़ी’ कहा जाता है।

संलग्न_ फोटो

💡 पृष्ठभूमि (Background)

लोक पर्व दुबड़ी एक पारंपरिक लोक आस्था और प्रकृति पूजन का उत्सव है, जो हर वर्ष जौनपुर के नैनबाग के मौगी पाब गाँव में मनाया जाता है। यह पर्व स्थानीय रीति-रिवाजों, लोक संगीत, नृत्य और प्रकृति के प्रति श्रद्धा को एक साथ लाता है। इसकी महत्ता इस बात में है कि यह न सिर्फ सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखता है, बल्कि ग्रामीण समुदाय को एकजुट करता है और पर्यावरणीय जागरूकता बढ़ाता है। आम जनता के लिए यह पर्व सामाजिक बंधन मजबूत करता है, पर्यटन को बढ़ावा देता है और कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित कर सकता ह

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।