लोकरंग पर्व: लोक धुनों और मनमोहक नृत्यों से सजी महफिल, भरथरी गाथा की सुरमई प्रस्तुति ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध
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छत्तीसगढ़ की बहुरंगी लोक संस्कृति, समृद्ध लोक संगीत और पारंपरिक कलाकृतियों को सहेजने तथा मंच प्रदान करने के उद्देश्य से राजधानी रायपुर में ‘लोकरंग पर्व’ का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। इस सांस्कृतिक संध्या में प्रदेश की समृद्ध लोक परंपराओं की ऐसी छटा बिखरी कि समूचा प्रेक्षागृह छत्तीसगढ़ी माटी की सोंधी खुशबू और पारंपरिक वाद्यों की गूंज से सराबोर हो उठा।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण पारंपरिक भरथरी गाथा की भावपूर्ण और सुरमई प्रस्तुति रही, जिसने दर्शकों को भक्ति, वैराग्य और लोक संगीत के अनूठे संगम से बांधे रखा। लोकरंग पर्व की प्रमुख झलकियां सांस्कृतिक पहलू प्रस्तुति एवं मुख्य आकर्षण भरथरी गाथा (Bharthari Saga) राजा भरथरी और रानी पिंगला के वैराग्य कथा का सुरमई व भावपूर्ण गायन।
पारंपरिक लोक नृत्य कर्मा, ददरिया, सुआ और पंथी नृत्यों की रंगारंग प्रस्तुतियां। पारंपरिक वाद्य यंत्र तंबूरा, मंजीरा, मांदर और ढोलक की लयबद्ध थाप। संस्कृति संरक्षण भावी पीढ़ी को राज्य की समृद्ध लोक कलाओं से जोड़ने की दिशा में सफल आयोजन। भरथरी गाथा की प्रस्तुति ने बिखेरा वैराग्य का रंग लोकरंग पर्व के दौरान जब कलाकारों ने तंबूरे और मंजीरे की धुन पर भरथरी गाथा का गायन शुरू किया, तो पूरा वातावरण तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
राजा भरथरी के सांसारिक जीवन को त्यागकर वैराग्य धारण करने और रानी पिंगला से विदा लेने के मर्मस्पर्शी प्रसंगों को कलाकारों ने इतने जीवंत और सुरीले अंदाज में प्रस्तुत किया कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। लोक धुनों और पारंपरिक नृत्यों की गूंज भरथरी गाथा के अलावा कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के विभिन्न अंचलों से आए प्रख्यात लोक कलाकारों ने अपनी सांस्कृतिक विधाओं का प्रदर्शन किया: लोक कला और संस्कृति के संरक्षण का संकल्प लोकरंग पर्व का आयोजन न केवल कलाकारों के उत्साहवर्धन का सशक्त माध्यम बना, बल्कि राज्य की विलुप्त होती लोक कलाओं को पुनर्जीवित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
आयोजन में उपस्थित विद्वानों और कला प्रेमियों ने माना कि इस तरह के आयोजनों से हमारी भावी पीढ़ी अपनी लोक जड़ों, गीतों और सांस्कृतिक धरोहरों के महत्व को गहराई से समझ पाती है। रायपुर में आयोजित ‘लोकरंग पर्व’ ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि छत्तीसगढ़ की लोक कला में अद्भुत आकर्षण और जीवंतता है।
भरथरी गाथा जैसी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने न केवल दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया, बल्कि छत्तीसगढ़ी माटी के गौरव और परंपराओं को एक नया आयाम भी दिया। The post लोकरंग पर्व: लोक धुनों और मनमोहक नृत्यों से सजी महफिल, भरथरी गाथा की सुरमई प्रस्तुति ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध appeared first on See Positive .
📡 स्रोत: NewsData.io