लोन दिलाने के नाम पर ठगी का नेटवर्क पकड़ा, दो आरोपी गिरफ्तार
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भोपाल। लोन दिलाने का झांसा देकर ग्रामीणों से अलग-अलग शुल्क के नाम पर रकम वसूलने वाले कथित गिरोह का गुनगा पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में फर्जी ई-मेल आईडी, वेबसाइट और मोबाइल ऐप के जरिए फाइनेंस कंपनी जैसा नेटवर्क संचालित किए जाने की बात सामने आई है। मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को इंदौर और शाजापुर से गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, ग्राम पंचायत क्षेत्र के निवासी भागीरथ गुर्जर ने शिकायत दर्ज कराई थी कि आरोपियों ने लोन स्वीकृत कराने के नाम पर उनसे प्रोसेसिंग फीस, फाइल चार्ज, टेक्निकल चार्ज और मॉर्गेज चार्ज सहित अलग-अलग मदों में कुल 60 हजार 300 रुपये लिए। आरोप है कि रकम लेने के बाद आरोपियों ने लोन प्रक्रिया के नाम पर फर्जी दस्तावेज भी उपलब्ध कराए।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों द्वारा डीएमआई और फिनलिप कंपनी के नाम से कथित फर्जी सेक्शन लेटर भेजे गए थे। ग्रामीणों को प्लॉट अथवा पट्टे की संपत्ति को मॉर्गेज रखकर लोन दिलाने का भरोसा दिया जाता था। इसके बाद लोन स्वीकृति और प्रक्रिया से जुड़े अलग-अलग शुल्क के नाम पर उनसे रकम ली जाती थी।
शिकायत के बाद गुनगा पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। मुखबिर से मिली सूचना और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने रवि मीना को इंदौर और मुरारी मीना को शाजापुर से गिरफ्तार किया।
पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि फर्जी ई-मेल, वेबसाइट और ऐप के जरिए कितने लोगों से संपर्क किया गया और कितने ग्रामीणों से इसी तरीके से रकम वसूली गई।
पुलिस मामले में आरोपियों के बैंक खातों, मोबाइल फोन, डिजिटल साक्ष्यों और कथित फर्जी दस्तावेजों की भी जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे नेटवर्क और ठगी की वास्तविक राशि का खुलासा हो सकेगा।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
यह खबर भोपाल के ग्रामीणों को लोन के झांसे में धोखा देने वाले एक फर्जी नेटवर्क के पकड़े जाने की है। पुलिस ने फर्जी ई-मेल, वेबसाइट और मोबाइल ऐप के जरिए फाइनेंस कंपनी के रूप में काम करने वाले गिरोह को उजागर किया। यह घटना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाती है कि डिजिटल माध्यम से भी ग्रामीणों को आसानी से ठगा जा सकता है। इससे आम जनता को सतर्क रहने और किसी भी लोन प्रस्ताव को सत्यापित करने की आवश्यकता महसूस होगी। यदि ऐसे घोटाले जारी रहे तो ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ सकता है और भरोसे क