राजनीति

मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण पर राहुल गांधी के दावे पर उठे सवाल

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 26 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण पर राहुल गांधी के दावे पर उठे सवाल

सितंबर 19, नई दिल्ली: मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के एक और दावे पर सवाल खड़े हो गए हैं। सोशल मीडिया पर राहुल गांधी के दावे की सच्चाई को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। राहुल गांधी ने इंदौर में दावा किया था कि मार्च 2019 में कांग्रेस सरकार ने OBC आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया था, जिसे बीजेपी ने कोर्ट का हवाला देते हुए रोक दिया।

लेकिन सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि राहुल गांधी के इस दावे की सच्चाई कुछ और है। रिपोर्टस् की मानें तो OBC आरक्षण को बढ़ाने के फैसले पर बीजेपी सरकार ने नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रोक लगाई थी, और यह आदेश उस समय आया था, जब मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी। दरअसल, कमलनाथ सरकार ने 8 मार्च 2019 को अध्यादेश जारी कर OBC आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया था।

इससे SC-ST-OBC आरक्षण कुल 63 प्रतिशत हो गया था।इसके सिर्फ 9 दिन बाद, 19 मार्च 2019 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई लंबित रहने तक कॉलेजों में प्रवेश के लिए 14 प्रतिशत से अधिक OBC आरक्षण लागू नहीं करने का निर्देश दिया था। बाद में बीजेपी सरकार ने 2 सितंबर 2021 को उन भर्तियों में 27 प्रतिशत OBC आरक्षण लागू करने का आदेश जारी किया, जिन पर अदालत में विशेष रोक नहीं थी।

इन तथ्यों के सामने आने के बाद राहुल गांधी के दावे पर सवाल उठ रहे हैं और उनपर झूठ बोलने के आरोप लग रहे हैं।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण पर राहुल गांधी के दावे पर उठे सवाल, यह विषय है कि कांग्रेस नेता ने 2019 में सरकार द्वारा आरक्षण में बढ़ोतरी का दावा किया, जिसे बीजेपी ने कोर्ट के हवाले से रोक दिया। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि आरक्षण नीति पर राजनीतिक विवाद लगातार चल रहा है, और ऐसे दावे चुनावी रणनीति और सार्वजनिक विश्वास पर असर डालते हैं। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि आरक्षण के लाभार्थियों को सही आंकड़ों पर भरोसा कम हो सकता है, और राजनीतिक दलों के बीच विश्वासघात की भावना बढ़ सकती है, जिससे सामाज

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।