मध्यप्रदेश कैबिनेट के बड़े फैसले, 24,500 करोड़ से अधिक की योजनाओं को मंजूरी
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अग्निवीरों को पुलिस-वन-जेल और आबकारी भर्ती में 20% क्षैतिज आरक्षण
दमोह-कटनी फोरलेन समेत शिक्षा, स्वास्थ्य और सिंचाई परियोजनाओं को मिली स्वीकृति
भोपाल, सितंबर 29: जिले राज्य कैबिनेट की बैठक में लगभग 24 हजार 500 करोड़ रुपये से अधिक की योजनाओं और परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई। बैठक में युवाओं के हित में बड़ा निर्णय लेते हुए पुलिस आरक्षक, विशेष सशस्त्र बल, जेल प्रहरी, वन रक्षक और आबकारी आरक्षक के पदों पर अग्निवीरों को 20 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने की मंजूरी दी गई।
कक्षा एक से आठवीं तक के विद्यार्थियों को गणवेश के लिए 348 करोड़ 7 लाख रुपये तथा अतिथि शिक्षकों के मानदेय के लिए आगामी पांच वर्षों के लिए 5 हजार 329 करोड़ 17 लाख रुपये स्वीकृत किए गए। कैबिनेट ने 105 किलोमीटर लंबे दमोह-कटनी चार लेन मार्ग के लिए 4 हजार 470 करोड़ 30 लाख रुपये की मंजूरी दे दी है।
स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए सिंगरौली जिला चिकित्सालय, छिंदवाड़ा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज और स्वास्थ्य केंद्रों से जुड़ी योजनाओं को भी वित्तीय स्वीकृति मिली। इसके अलावा दतिया, नीमच और सागर की सिंचाई परियोजनाओं तथा सिंहस्थ-2028 के दृष्टिगत उज्जैन की कान्ह डायवर्सन परियोजना की निरंतरता को भी मंजूरी दी गई।
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चैतन्य कश्यप, एमएसएमई मंत्री मप्र
💡 पृष्ठभूमि (Background)
मध्यप्रदेश कैबिनेट ने 24,500 करोड़ रुपये से अधिक की योजनाओं को मंजूरी दी है, जिसमें अग्निवीरों के लिए पुलिस, वन, जेल और आबकारी भर्ती में 20% क्षैतिज आरक्षण तथा दमोह‑कटनी फोरलेन समेत शिक्षा, स्वास्थ्य और सिंचाई परियोजनाओं की स्वीकृति शामिल है। यह निर्णय युवाओं के रोजगार और सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देने के लिए है, जिससे राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इससे आम जनता को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएँ और जल संसाधन प्रबंधन की सुविधा मिलेगी, साथ ही अग्निवीरों के लिए स्थायी नौकरी के अवसर सुनिश
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
मध्यप्रदेश के बड़े योजनाओं की स्वीकृति से युवाओं को नई रोजगार और शिक्षा के अवसर मिलेंगे, परंतु यह भी याद रखना चाहिए कि समाज की प्रगति केवल आर्थिक योजनाओं पर निर्भर नहीं करती। जब भी किसी संघर्ष का सामना हो, शांतिपूर्ण संवाद, कानूनी रास्ते और सहानुभूति का सहारा लें। हर व्यक्ति को अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाने का अधिकार है, और समाज को एकजुट होकर समावेशी विकास की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए।