मध्यप्रदेश की शिशु मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से 11 अंक अधिक, सरकार जवाब दे: जीतू पटवारी
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SRS-2024 के आंकड़ों का हवाला देकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठाए सवाल
भोपाल, 4 अक्टूबर। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रदेश में शिशु मृत्यु दर के आंकड़ों को लेकर भाजपा सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के दावे करती है, लेकिन केंद्र सरकार के आधिकारिक आंकड़े प्रदेश में शिशु एवं बाल स्वास्थ्य की स्थिति को लेकर गंभीर तस्वीर सामने रखते हैं।
पटवारी ने कहा कि भारत के महापंजीयक कार्यालय की SRS Statistical Report 2024 के अनुसार मध्यप्रदेश में प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर शिशु मृत्यु दर 35 है, जबकि राष्ट्रीय औसत 24 है। इस तरह मध्यप्रदेश की शिशु मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से 11 अंक अधिक है। उन्होंने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि राष्ट्रीय स्तर पर शिशु मृत्यु दर 24 तक पहुंचने के बावजूद मध्यप्रदेश में यह दर 35 क्यों बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और अधिक चिंताजनक है। SRS-2024 के अनुसार मध्यप्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में शिशु मृत्यु दर 37 प्रति 1,000 जीवित जन्म है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 28 है। पटवारी ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य केंद्रों की उपलब्धता, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों, समय पर रेफरल, नवजातों के लिए आपातकालीन उपचार और परिवहन जैसी व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाए।
पटवारी ने प्रदेश में बालक-बालिका शिशु मृत्यु दर के अंतर को भी चिंता का विषय बताया। उनके अनुसार SRS-2024 में मध्यप्रदेश में बालिकाओं की शिशु मृत्यु दर 36 और बालकों की 35 प्रति 1,000 जीवित जन्म दर्ज की गई है। उन्होंने सरकार से पूछा कि बालिकाओं की शिशु मृत्यु दर बालकों से अधिक होने के पीछे स्वास्थ्य, पोषण और सामाजिक कारणों को दूर करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।
उन्होंने NFHS-5 (2020-21) के आंकड़ों का भी उल्लेख किया। पटवारी के अनुसार मध्यप्रदेश में नवजात मृत्यु दर 29.0, शिशु मृत्यु दर 41.3 और पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर 49.2 प्रति 1,000 जीवित जन्म रही। ग्रामीण क्षेत्रों में यह क्रमशः 30.4, 43.5 और 52.5 रही।
पटवारी ने कहा कि SRS और NFHS की कार्यप्रणाली अलग-अलग है, इसलिए दोनों स्रोतों के आंकड़ों की सीधे तुलना नहीं की जानी चाहिए। हालांकि, दोनों आधिकारिक स्रोत प्रदेश में शिशु एवं बाल स्वास्थ्य के सामने मौजूद चुनौती की ओर संकेत करते हैं।
उन्होंने सरकार से पूछा कि मध्यप्रदेश की शिशु मृत्यु दर को राष्ट्रीय औसत 24 या उससे नीचे लाने के लिए क्या लक्ष्य और समय-सीमा तय की गई है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में PHC और CHC स्तर पर बाल रोग विशेषज्ञों, प्रशिक्षित स्टाफ और आवश्यक जीवनरक्षक उपकरणों की उपलब्धता पर भी सवाल उठाया।
पटवारी ने SNCU और NBSU की क्षमता तथा वहां 24 घंटे प्रशिक्षित डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की उपलब्धता की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने अधिक शिशु मृत्यु दर वाले जिलों के लिए विशेष कार्ययोजना, नवजात एवं शिशु मृत्यु की जिला-वार डेथ ऑडिट रिपोर्ट और मृत्यु के प्रमुख कारणों की जानकारी सार्वजनिक करने का सवाल भी उठाया।
उन्होंने कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर लगातार बजट खर्च होने के बावजूद यदि प्रदेश की शिशु मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है, तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। सरकार को बताना चाहिए कि इसके लिए किस स्तर पर जिम्मेदारी निर्धारित की गई है।
पटवारी ने कहा कि बच्चों की जान बचाना किसी सरकार के प्रचार का विषय नहीं, बल्कि उसका बुनियादी मानवीय और संवैधानिक दायित्व है। केवल संस्थागत प्रसव की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। प्रसव के बाद नवजात देखभाल, पोषण, संक्रमण नियंत्रण, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों, समय पर रेफरल और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को भी मजबूत करना जरूरी है।
उन्होंने सरकार से आंकड़ों और उपलब्धियों के प्रचार के बजाय जिला-वार वास्तविक स्थिति, शिशु मृत्यु के कारणों और डेथ ऑडिट रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग की। पटवारी ने कहा कि मध्यप्रदेश की शिशु मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से 11 अंक अधिक होना सरकार के लिए गंभीर चेतावनी है और प्रदेश के बच्चों की जान बचाने के लिए प्रभावी कदमों के साथ जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।