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मध्यप्रदेश की ‘सुमन पंचायत’ पहल को राष्ट्रीय पहचान, सुमन रोडमैप 2030 में शामिल

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 26 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
मध्यप्रदेश की ‘सुमन पंचायत’ पहल को राष्ट्रीय पहचान, सुमन रोडमैप 2030 में शामिल

भोपाल: मध्यप्रदेश की मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए शुरू की गई ‘सुमन पंचायत’ और ‘सुमन सखी चैटबॉट’ पहल को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। लखनऊ में आयोजित नेशनल वर्कशॉप ऑन सुमन रोडमैप 2030 में इन दोनों नवाचारों को बेस्ट प्रैक्टिस और अन्य राज्यों में लागू किए जाने वाले स्केलेबल इंटरवेंशन के रूप में मान्यता दी गई।

उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने इस उपलब्धि को प्रदेश के लिए गौरव का विषय बताया। उन्होंने कहा कि सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सुरक्षित, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने पर लगातार काम कर रही है। समुदाय की भागीदारी, डिजिटल तकनीक और डेटा आधारित मॉनिटरिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है।

राष्ट्रीय स्तर पर लागू होगा मॉडल

2 और 3 सितंबर को लखनऊ में आयोजित कार्यशाला में मध्यप्रदेश की सुमन पंचायत और सुमन सखी चैटबॉट की कार्यप्रणाली और उपयोगिता का प्रदर्शन किया गया। इन पहलों को मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को समुदाय तक पहुंचाने और महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने के लिए सराहा गया। अब इन मॉडलों को अन्य राज्यों में भी स्थानीय जरूरतों के अनुरूप अपनाया जा सकेगा।

इन दोनों पहलों को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की सुमन रोडमैप 2030 गाइडलाइंस में भी जगह मिली है।

सुमन पंचायत से समुदाय की भागीदारी

‘सुमन पंचायत’ का उद्देश्य पंचायत स्तर पर समुदाय को सुरक्षित मातृत्व और नवजात स्वास्थ्य से जोड़ना है। इसके जरिए गर्भवती महिलाओं और परिवारों को समय पर जांच, संस्थागत प्रसव, प्रसव पूर्व एवं प्रसव पश्चात देखभाल और नवजात की देखभाल के प्रति जागरूक किया जाता है।

इस पहल के तहत यदि कोई ग्राम पंचायत लगातार एक साल तक अपने क्षेत्र में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को शून्य बनाए रखती है, तो उसे सरकार की ओर से 1 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।

सुमन सखी चैटबॉट से डिजिटल हेल्थ जानकारी

‘सुमन सखी चैटबॉट’ के जरिए महिलाओं और परिवारों को गर्भावस्था, प्रसव, नवजात शिशु की देखभाल और उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी जरूरी जानकारी डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जाती है। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं और समुदाय के बीच सूचना के अंतर को कम करना और महिलाओं को सही समय पर सही जानकारी उपलब्ध कराना है।

‘अनमोल 2.0’ डैशबोर्ड भी बना आकर्षण

राष्ट्रीय कार्यशाला में मध्यप्रदेश के अनमोल 2.0 डैशबोर्ड का भी प्रदर्शन किया गया। इसके जरिए हाई रिस्क प्रेग्नेंट महिलाओं की पहचान, ट्रैकिंग और फॉलोअप को प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया है। डैशबोर्ड से ऐसी महिलाओं को समय पर आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने और संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।