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महाकाव्य भगवान परशुराम लोकार्पित और गोष्ठी में गूंजी लोकसाहित्य की रचनाएं ।

लेखक: Santosh Yogi अंतिम अपडेट: 4 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
महाकाव्य भगवान परशुराम लोकार्पित और गोष्ठी में गूंजी लोकसाहित्य की रचनाएं ।

तुलसी साहित्य अकादमी की सृजन श्रृंखला - 61 के अंतर्गत महाकवि डा.अशोक तिवारी अमन के महाकाव्य “भगवान परशुराम” का लोकार्पण एवं विमर्श तथा लोकसाहित्य पर केन्द्रित रचनाओं के काव्य पाठ का आयोजन तुलसी साहित्य अकादमी के मुख्यालय के सभागार में राष्ट्रीय अध्यक्ष डा.मोहन तिवारी आनंद, की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार चरणजीत सिंह कुकरेजा, सारस्वत अतिथि अशोक निर्मल, विशिष्ट अतिथि अशोक धमनियां, -डा. राजेश श्रीवास्तव, कर्नल डा. गिरिजेश सक्सेना और कार्यक्रम संयोजक सुरेश पटवा रहे। नगर के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. गौरी शंकर शर्मा गौरीश, डॉक्टर राजेश श्

तिवारी और महेश सक्सेना की उपस्थिति ने लोकार्पण कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की। मंचस्थ अतिथियों द्वारा माता सरस्वती का पूजन अर्चन एवं दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। सर्वप्रथम श्री शरद व्यास ने सरस्वती वंदना का सस्वर पाठ किया।

डा.राजेश तिवारी महासचिव तुलसी साहित्य अकादमी ने स्वागत उद्बोधन दिया ।मंचस्थ अतिथियों द्वारा महाकाव्य भगवान परशुराम लोकार्पण किया गया। महाकाव्य के रचनाकार डा.अशोक तिवारी अमन ने कृति की सृजन पर प्रकाश डालते हुए महाकाव्य के कुछ अंशों का पाठ किया।

डॉक्टर मोहन तिवारी आनंद राष्ट्रीय अध्यक्ष तुलसी साहित्य अकादमी ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कार्यक्रम के उत्कृष्ट संयोजन, गंभीरता पूर्वक पुस्तक समीक्षा तथा अतिथियों के उद्गारों की सराहन करते हुए कृतिकार के सृजन कौशल की सराहना करते हुए कि आजकल इतनी सारगर्भित रचनाओं का सृजन देखने में कम ही आ रहा है।

महाकवि डा.अशोक तिवारी अमन के उत्तम और सफल प्रयास पर मुझे पूर्ण विश्वास है कि इस महाकाव्य के पाठक अवश्य ही इस ग्रंथ के सृजनकार के कौशल की सराहना करेंगे।

मुख्य अतिथि चरणजीत सिंह कुकरेजा जी ने लोकार्पित कृति के सृजन की सराहना करते हुए डा.अमन की कलम से निसृत कथा की प्रसंशा करते हुए कहा इस महाकाव्य में शब्द एवं कथा संयोजन उत्कृष्ट श्रेणी का है तथा रस, छंद, अलंकार तथा मुहावरों के प्रयोग ने कथाओं में रोचकता भरी है।

सुरेश पटवा ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बड़ी संख्या में उपस्थित साहित्यकारों का स्वागत करते हुए कहा कि तुलसी साहित्य अकादमी प्रति माह गोष्ठी का आयोजन करके विभिन्न साहित्यिक गतिविधियों को अंजाम देती हैं।

यह अत्यंत प्रसंशनीय है कि पिछले माह में “शिव विविधवाली ” तथा आज “भगवान परशुराम” का लोकार्पण अपने आप में पुनीत एवं अद्वितीय कार्य है। श्री वी.के.श्रीवास्तव ने लोकार्पित कृति की विस्तार से समीक्षा की।

उन्होंने कृति में वर्णित कथाओं के रचना विधान शब्द संयोजन तथा प्रयुक्त भाषा शैली की सराहना करते हुए कवि डा.अशोक तिवारी अमन के रचना कौशल की सराहना में स्पष्ट कहा कि बहुत दिनों बाद एक उत्कृष्ट महाकाव्य हम सभी के बीच में आया है।

कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में 28 रचनाकारों ने लोकभाषा पर केन्द्रित अपनी चुनिंदा रचनाओं का पाठ किया। गोकुल सोनी ने “आ मुसीबत पड़ी धर्म पर, दीपक पंडित ने “आओ यमुना तीर ओ कान्हा”, शरद व्यास ने “हुई शाम जब टिम टिम करके द्वीप जले”, कैलाश मेश्राम ने “मेरे सुर जो मिले तेरी आवाज से पग धरातल गगन हो गए”,

सुंदर लाल प्रजापति ने “जिसको समझा था अंधेरा वो उजाला निकला”, हरिओम श्रीवास्तव ने “गाँव न अब पेले से रह गए हैं”,मनोरमा श्रीवास्तव ने “आओ बँशी बजैया”, लक्ष्मी कांत जाँवने ने “मेरे तनु मैं अधरों पर रोक लूँगी”, चरणजीत कुकरेजा ने हरिशंकर दुबे ने “दिव्य ज्योति जलती रहे”, चंद्र भान चंदर ने “प्रेम का यह गीत तुम न पढ़ पाओगी”, शिवराज सिंह चौहान ने “जान पाएंगे वो मिट्टी खुश्बू”, सीमा हरि शर्मा ने “तुम्हारी आहट तुम्हारी ध्वनियाँ”, हरि वल्लभ शर्मा ने “मध्य निशा वर दे प्रभु जी” रचनाएं सुनाईं।

कार्यक्रम का सफल संचालन तुलसी साहित्य अकादमी महासचिव डा.शिवकुमार दीवान ने किया। आभार प्रदर्शन हरिशंकर दुबे ने किया। अंत में चाय एवं स्वल्पाहार के बाद कार्यक्रम संपन्न हो ने की घोषणा की गई।

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Santosh Yogi

संतोष योगी भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार हैं जो भोपाल जिला एवं आसपास की घटनाओं को प्रमुखता से कवर करते हैं।