महापर्व क्षमापना समारोह में उपराष्ट्रपति का संबोधन
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04 अक्टूबर, नई दिल्ली: उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में महापर्व क्षमापना समारोह-2026 को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह समारोह क्षमा, मित्रता, अहिंसा और आंतरिक शुद्धि के मूल्यों का संदेश देता है।उपराष्ट्रपति ने कहा कि जैन धर्म में क्षमा का विशेष महत्व है और इसका संदेश आज भी भारत और पूरी मानवता के लिए प्रासंगिक है।उन्होंने कहा कि क्षमापना सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि खुद में बदलाव लाने का अवसर है।उन्होंने कहा कि संघर्ष और हिंसा से जूझ रही दुनिया में भगवान महावीर की शिक्षाएं शांति, संवाद, साथ रहने और करुणा का रास्ता दिखाती हैं।
उन्होंने सभी जीवों से मित्रता और किसी से दुश्मनी न रखने की जैन शिक्षा को भारत के "वसुधैव कुटुम्बकम" के विचार से जोड़ा।उपराष्ट्रपति ने कहा कि अहिंसा का मतलब सिर्फ शारीरिक हिंसा से बचना नहीं, बल्कि विचार, वचन और कर्म में भी हिंसा से दूर रहना है।
उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने आंतरिक जीत का रास्ता दिखाया और बताया कि सच्ची ताकत क्रोध, असहिष्णुता और बदले की भावना पर काबू पाने में है।क्षमा के बारे में उन्होंने कहा कि इसका मतलब अन्याय को स्वीकार करना या सच्चाई से समझौता करना नहीं है। उन्होंने कहा कि क्षमा का अर्थ बदले की जगह सुधार, घृणा की जगह बातचीत और दुश्मनी की जगह सुलह को चुनना है।
उन्होंने कहा कि प्रतिक्रमण की भावना लोगों और परिवारों को अपनी गलतियां स्वीकार करने और विवाद सुलझाने में मदद कर सकती है।तमिलनाडु और जैन धर्म के पुराने संबंधों का जिक्र करते हुए सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि जैन धर्म ने तमिल साहित्य और संस्कृति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने तमिल साहित्य में जैन विद्वानों और भिक्षुओं के योगदान के साथ राज्य में मौजूद पुराने जैन मंदिरों और शिक्षा केंद्रों का भी उल्लेख किया।विकसित भारत @ 2047 का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकास सिर्फ आर्थिक तरक्की, आधुनिक बुनियादी ढांचे और तकनीक तक सीमित नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत में लोगों के बीच विश्वास, परिवारों में अच्छे मूल्य, युवाओं में चरित्र और समाज में करुणा भी होनी चाहिए। उन्होंने इसे "विकास भी, विरासत भी" के विचार से जोड़ा।उन्होंने लोगों से विकसित भारत के निर्माण में विनम्रता, करुणा, सेवा, एकता और जिम्मेदारी जैसे मूल्यों को बढ़ावा देने का आह्वान किया।इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने के.
सी. जैन को जैन समाज रत्न पुरस्कार भी प्रदान किया। (Source: उप राष्ट्रपति सचिवालय)