महाराष्ट्र में धर्मांतरण कानून लागू, जबरन धर्म परिवर्तन पर 7 साल तक सजा
अगस्त 28, नई दिल्ली: महाराष्ट्र में धर्मांतरण से जुड़ा ‘महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम, 2026’ आज से पूरे राज्य में लागू हो गया है। इस कानून का उद्देश्य बल, धोखाधड़ी, दबाव, प्रलोभन या किसी अन्य तरह के लालच के जरिए कराए जाने वाले धर्म परिवर्तन पर रोक लगाना है।
कानून में विवाह के जरिए जबरन या अनुचित प्रभाव डालकर कराए जाने वाले धर्मांतरण को भी इसके दायरे में रखा गया है।कानून के तहत स्वैच्छिक धर्म परिवर्तन की स्वतंत्रता बरकरार रखते हुए इसके लिए एक निर्धारित प्रक्रिया तय की गई है।
यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे धर्म बदलने से 60 दिन पहले जिलाधिकारी (DM) को आवेदन देना होगा। धर्मांतरण कराने वाले धर्मगुरु को भी 60 दिन पहले प्रशासन को इसकी सूचना देनी होगी।
धर्मांतरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रशासन के समक्ष दोबारा घोषणा करना भी अनिवार्य होगा।पीड़ित खुद दर्ज करा सकेगा शिकायतनए कानून के तहत जबरन या धोखे से धर्मांतरण कराए जाने पर पीड़ित व्यक्ति स्वयं पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकता है।
यदि पीड़ित शिकायत करने की स्थिति में नहीं है, तो उसके माता-पिता, भाई-बहन या परिवार का कोई सगा रिश्तेदार भी पुलिस में FIR दर्ज करा सकता है।10 साल तक की सजा का प्रावधानअधिनियम के तहत सामान्य अवैध धर्मांतरण के मामले में दोषी पाए जाने पर अधिकतम 7 वर्ष की जेल और 1 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
यदि धर्मांतरण किसी महिला, नाबालिग, SC/ST वर्ग के व्यक्ति या सामूहिक रूप से कराया जाता है, तो 7 वर्ष तक की जेल के साथ 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।वहीं, अपराध दोहराने पर अधिकतम 10 वर्ष तक के कारावास और 7 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
यदि कोई संस्था या संगठन अवैध धर्मांतरण की गतिविधियों में शामिल पाया जाता है, तो उसकी तय सजा के अलावा संस्था का पंजीकरण रद्द किया जा सकता है और उसे मिलने वाली सरकारी वित्तीय सहायता तत्काल बंद की जा सकती है।