महाराष्ट्र के लोहारा की देवरानी-जेठानी ने बढ़ाया आदिवासी तड़वी-भील समाज का गौरव, हिना जमादार को आदिवासी उद्यमिता पुरस्कार, सीमा जमादार नगरसेविका निर्वाचित
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वॉयस ऑफ क्रांति, लाला जमालकर की रिपोर्ट
खरगोन/रावेर। आदिवासी तड़वी-भील समाज के लिए यह गौरव और प्रसन्नता का विषय है कि एक ही परिवार की दो बहुओं ने अपने-अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल कर समाज का नाम रोशन किया है। एक ओर श्रीमती हिना अजित जमादार को दैनिक नवराष्ट्र की ओर से आदिवासी उद्यमिता पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, वहीं दूसरी ओर उनकी जेठानी श्रीमती सीमा आरिफ जमादार रावेर नगर परिषद में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीट से बहुमत के साथ नगरसेविका निर्वाचित हुई हैं।
दोनों देवरानी-जेठानी सेवानिवृत्त मंडल अधिकारी श्री डी.के. जमादार 'अप्पा' की बहुएं हैं। हिना अजित जमादार परिवार की छोटी बहू हैं, जबकि सीमा आरिफ जमादार बड़ी बहू हैं। दोनों ने अपने-अपने कार्यक्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करते हुए परिवार के साथ-साथ आदिवासी तड़वी-भील समाज का गौरव बढ़ाया है।
सातपुड़ा की तलहटी में स्थित लोहारा गांव की निवासी हिना अजित जमादार ने एमएससी (कंप्यूटर) जैसी उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद पारंपरिक वारली कला एवं संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन को अपने कार्यक्षेत्र के रूप में चुना। उन्होंने कॉर्पोरेट क्षेत्र में रोजगार के अवसरों के बजाय अपनी मातृभूमि की पारंपरिक कला को आगे बढ़ाने को प्राथमिकता दी।
पति अजित जमादार एवं परिवार के सहयोग से हिना जमादार ने 'हिना वारली आर्ट्स एंड गैलरी' तथा 'आशियाना आदिवासी महिला बचत समूह' के माध्यम से ग्रामीण एवं आदिवासी महिलाओं को संगठित कर उन्हें रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसर उपलब्ध कराने की पहल की। पारंपरिक वारली चित्रकला को आधुनिक उपयोग की वस्तुओं से जोड़ते हुए चाय की ट्रे, मग, चाबी के छल्ले, जैकेट, सजावटी वस्तुओं सहित विभिन्न प्रकार की कलाकृतियां तैयार की जा रही हैं।
इन कलाकृतियों को अमेजन, फ्लिपकार्ट, उमेद मार्ट और unica4u.com जैसे ऑनलाइन माध्यमों के जरिए देश के विभिन्न हिस्सों के साथ विदेशों तक भी पहुंचाया जा रहा है। लोहारा की महिलाओं द्वारा तैयार की गई वारली कलाकृतियों का ऑस्ट्रेलिया तक पहुंचना इस पहल की उल्लेखनीय उपलब्धियों में शामिल है।
हिना जमादार नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित 'आदिकर्मयोगी अभियान राष्ट्रीय परिषद' में महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व भी कर चुकी हैं। उनके कार्यों को देखते हुए दैनिक नवराष्ट्र की ओर से उन्हें 'आदिवासी उद्यमिता पुरस्कार' से सम्मानित किया गया।
वहीं हिना जमादार की जेठानी सीमा आरिफ जमादार ने स्थानीय राजनीति एवं जनसेवा के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है। रावेर नगर परिषद के चुनाव में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीट से बहुमत के साथ नगरसेविका निर्वाचित होकर उन्होंने आदिवासी महिला नेतृत्व के रूप में अपनी भूमिका स्थापित की है।
नगर परिषद में आदिवासी समाज का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिलने से क्षेत्र के समाजजनों में खुशी है। सीमा जमादार की चुनावी सफलता से समाज की महिलाओं और युवतियों को भी सार्वजनिक जीवन एवं जनसेवा के क्षेत्र में आगे आने की प्रेरणा मिलने की बात कही जा रही है।
एक ओर हिना अजित जमादार ने कला, महिला सशक्तिकरण और उद्यमिता के क्षेत्र में ग्रामीण एवं आदिवासी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम किया है, वहीं दूसरी ओर सीमा आरिफ जमादार ने निर्वाचित जनप्रतिनिधि के रूप में सार्वजनिक जीवन में कदम बढ़ाया है। एक ही परिवार की दोनों बहुओं की उपलब्धियां परिवार के साथ-साथ आदिवासी तड़वी-भील समाज के लिए भी चर्चा और गौरव का विषय बनी हैं।
दोनों की उपलब्धियों पर समाजबंधुओं, नागरिकों और शुभचिंतकों ने बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। हिना और सीमा जमादार की उपलब्धियां आदिवासी समाज की महिलाओं और युवतियों को विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने वाली हैं।