मैड़ में 300 साल पुरानी परंपरा, निकली भगवान नरसिंह की शोभायात्रा
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मैड़ (कोटपूतली-बहरोड़), 22 अक्टूबर। विराटनगर उपखंड के मैड़ कस्बे में भगवान नरसिंह की करीब 300 साल पुरानी परंपरा के तहत भव्य शोभायात्रा निकाली गई। मध्यरात्रि से शुरू होकर सूर्योदय तक चले इस धार्मिक आयोजन में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। भगवान के दर्शन के लिए राजस्थान सहित देश के विभिन्न हिस्सों से लोग मैड़ पहुंचे। पूरे कस्बे में भक्ति और आस्था का माहौल देखने को मिला।
मंदिर के पुजारी श्याम सुंदर शर्मा के अनुसार, भगवान नरसिंह की शोभायात्रा की परंपरा करीब 300 वर्षों से लगातार निभाई जा रही है। शोभायात्रा रात करीब 2 बजे शुरू हुई और सुबह लगभग 5 बजे सूर्योदय तक चली। इस दौरान भगवान गणेश, भगवान शिव, माता पार्वती सहित विभिन्न देवी-देवताओं की आकर्षक झांकियों के दर्शन करवाए गए। झांकियों के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में एकत्रित हुए।
धार्मिक परंपरा के अनुसार, भगवान नरसिंह की सवारी गाजे-बाजे और जयकारों के बीच निकाली गई। इस दौरान छह श्रद्धालुओं ने लकड़ी के तख्त को अपने कंधों पर उठाया, जिस पर भगवान नरसिंह विराजमान थे। श्रद्धालुओं का उत्साह और भगवान के प्रति उनकी आस्था देखते ही बन रही थी।
परंपरा के अनुसार, भगवान नरसिंह की सवारी को बाणगंगा नदी के तट पर स्नान कराया गया। इसके बाद सवारी को लीले के टीबे तक ले जाया गया। करीब दो किलोमीटर का रास्ता लगभग 10 मिनट में तय किया गया। इस अनूठी परंपरा को देखने के लिए रास्ते में बड़ी संख्या में लोग जुटे रहे।
भगवान नरसिंह की शोभायात्रा जानकीनाथ मंदिर, राजपूत हवेली और गोपीनाथ मंदिर होते हुए नरसिंह मंदिर पहुंची। मार्ग में श्रद्धालुओं ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर भगवान की सवारी का स्वागत किया। भजन, जयकारों और धार्मिक उत्साह के बीच पूरा मार्ग भक्तिमय नजर आया।
इस आयोजन में देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए भगवान नरसिंह के दर्शन करना विशेष महत्व रखता है। सालभर अपने कामकाज में व्यस्त रहने वाले कई लोगों के लिए यह आयोजन अपने आराध्य के प्रति आस्था प्रकट करने के साथ अपनी जन्मभूमि, परंपराओं और पुरानी यादों से जुड़ने का अवसर भी बना।
मैड़ में आयोजित यह शोभायात्रा क्षेत्र की प्राचीन धार्मिक परंपरा और लोकआस्था का प्रतीक बनी। करीब तीन शताब्दियों से चली आ रही इस परंपरा में श्रद्धालुओं की भागीदारी ने कस्बे के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को एक बार फिर दर्शाया।
बाइट - श्याम सुंदर शर्मा, पुजारी
बाइट - रवि शर्मा