ममता के 20 बागी सांसदों में 17 भाजपा में जाएंगे:यूसूफ पठान सहित तीन का बाहर से समर्थन; विधानसभा चुनाव हार के बाद TMC टूटी थी
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →ममता बनर्जी से अलग हुए TMC के 20 बागी सांसदों में से 17 सांसद अक्टूबर में दुर्गा पूजा से पहले या बाद भाजपा में शामिल होंगे। कूच बिहार सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने रविवार को कोलकाता में पत्रकारों से बातचीत में इसकी जानकारी दी। बसुनिया के अनुसार, दो-तिहाई से ज्यादा सांसदों के साथ जाने से दल-बदल कानून लागू नहीं होगा।
बंगाल में TMC की हार के बाद 14 जून को बागी सांसदों ने ममता का साथ छोड़ दिया था। इन सांसदों ने त्रिपुरा की स्थानीय पार्टी NCPI में विलय किया और NDA को समर्थन देने का ऐलान किया। अब ये सांसद सीधे भाजपा में शामिल होंगे हालांकि तीन सांसद- अबू ताहेर खान, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान भाजपा में शामिल हुए बिना बाहर से NDA का समर्थन करेंगे।
ममता से अलग हुए 20 बागी सांसदों के नाम… बागी सांसदों के भाजपा में शामिल होने की प्रक्रिया को 4 सवाल-जवाब में समझें....
सवाल: दल-बदल कानून क्या है?
जवाब: 1985 में संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत बने दल-बदल कानून का उद्देश्य सांसदों और विधायकों को पार्टी बदलने या पार्टी व्हिप के खिलाफ वोट देने से रोकना है। उल्लंघन पर सदस्यता जा सकती है। सवाल: 17 बागी सांसदों को छूट कैसे मिलेगी?
जवाब: कानून में विलय की छूट है। यदि किसी पार्टी के विधायी दल के कम से कम दो-तिहाई सदस्य किसी दूसरी पार्टी में विलय का फैसला करते हैं, तो उन पर दल-बदल कानून लागू नहीं होता। हालांकि, यह छूट तभी मिलेगी जब विलय की कानूनी शर्तें पूरी हों। केवल सांसदों के किसी समूह द्वारा दूसरी पार्टी में जाने का दावा करना पर्याप्त है या नहीं, यह कानून और संबंधित प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। सवाल: तीन सांसद BJP में क्यों नहीं जाएंगे?
जवाब: अबू ताहेर खान, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान ने अपने क्षेत्रों की राजनीतिक और प्रशासनिक परिस्थितियों का हवाला दिया है। संभावित कारणों में मुस्लिम मतदाताओं की नाराजगी का डर और अपने निर्वाचन क्षेत्रों में राजनीतिक समर्थन बनाए रखना शामिल है। इसलिए वे BJP में शामिल होने के बजाय बाहर से NDA का समर्थन करेंगे। सवाल: बंगाल में अल्पसंख्यक वोट बैंक का कितना महत्व है?
जवाब: पश्चिम बंगाल में मुस्लिम मतदाता आबादी का करीब 30% हैं। इसलिए उनका समर्थन चुनावी नतीजों पर बड़ा असर डाल सकता है और राजनीतिक दल इसे महत्वपूर्ण मानते हैं। ममता के पास अब सिर्फ 22 विधायक
📡 स्रोत: Dainik Bhaskar