मां बोली- बेटे को पुलिस ने मारा..अब तस्वीर ही सहारा:प्रत्यक्षदर्शी का दावा-थाने में मारपीट के बाद मौत हुई; पुलिस ने कहा- आरोप गलत
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →मंदसौर की हेमाबाई की आंखों से आंसू नहीं थम रहे। मोबाइल में बेटे ऋतुराज की तस्वीर देखते ही वह बिलख पड़ती हैं। 16 साल 9 महीने के बेटे को खोने के बाद उनके पास अब उसकी यादें और तस्वीर ही बची हैं। पिता प्रकाश लोहार की मांग है कि बेटे की मौत के जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई हो और मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
ऋतुराज को जयपुर के मुहाना थाने लाए जाने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ी थी। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान 5 अक्टूबर को उसकी मौत हो गई। परिवार ने पुलिस पर थर्ड डिग्री देने और घटना छिपाने के आरोप लगाए हैं। थाने में मौजूद रहे ललित नागदा ने भी ऋतुराज के साथ मारपीट होने का दावा किया है।
हालांकि, पुलिस ने थाने में मारपीट के आरोपों से इनकार किया है। मामले की न्यायिक जांच शुरू हो चुकी है। दैनिक भास्कर की टीम मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ क्षेत्र के मनासा खुर्द स्थित ऋतुराज के घर पहुंची तो परिवार गहरे सदमे में मिला। मां बेटे की तस्वीर सीने से लगाए रो पड़ती हैं, जबकि पिता न्याय की आस लगाए बैठे हैं।
परिवार के आरोपों के बीच जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि थाने के भीतर क्या हुआ, ऋतुराज के सिर में गंभीर चोट कैसे लगी और उसकी उम्र को लेकर दस्तावेजों में अंतर क्यों है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… सोने की चेन के पैसों को लेकर हुआ था विवाद ऋतुराज के पिता प्रकाश लोहार ने बताया कि वह करीब आठ महीने से दुबई में वेल्डिंग का काम कर रहे थे।
जयपुर के एक होटल में काम करने वाले मनोज से उनकी पहचान थी। प्रकाश के मुताबिक, मनोज ने दुबई से सोने की चेन लाने के लिए 16 सितंबर को उनके खाते में 4 लाख रुपए भेजे थे। पूरा भुगतान एक्सचेंज नहीं हो पाने के कारण वह चेन नहीं ला सके और भारत लौट आए। प्रकाश ने बताया कि 17 सितंबर को ललित उन्हें लेने जयपुर एयरपोर्ट पहुंचा था।
उसके साथ मनोज भी था। एयरपोर्ट से होटल जाते समय सादे कपड़ों में दो लोगों ने उनकी गाड़ी रुकवाई। उन्होंने खुद को क्राइम ब्रांच का बताया और पासपोर्ट जब्त करते हुए गाड़ी व सामान की तलाशी ली। इसके बाद सभी द गोल्ड होटल पहुंचे, जहां दोबारा सामान की जांच के बाद दोनों लोग चले गए। 50 हजार रुपए मोबाइल से ट्रांसफर किए प्रकाश के मुताबिक, इसके बाद मनोज ने सोने की चेन के पैसे वापस मांगे।
उन्होंने 17 सितंबर को 2 लाख और 18 सितंबर को 50 हजार रुपए मोबाइल से ट्रांसफर किए। 19 सितंबर को मनोज के कहने पर वह इस्कॉन रोड स्थित रियांश होटल में रुक गए। प्रकाश ने बताया कि मनोज से मिले 4 लाख रुपए में से कुछ रकम खर्च हो गई थी। 21 सितंबर को ऋतुराज जयपुर पहुंचा तो प्रकाश ने उसके जरिए एक लाख रुपए और मनोज को दिए।
इसके बाद प्रकाश मंदसौर लौट आए, जबकि ऋतुराज जयपुर में घूमने के लिए रुक गया। प्रकाश के अनुसार, 22 सितंबर को ललित के फोन से बेटे की तबीयत गंभीर होने की जानकारी मिली। परिवार जयपुर पहुंचा तो ऋतुराज आईसीयू में भर्ती था। प्रकाश ने दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के साथ मनोज की भूमिका की भी जांच की मांग की।
फोन-पे हिस्ट्री में नहीं मिला लेन-देन का स्पष्ट रिकॉर्ड प्रकाश ने मनोज को पैसे लौटाने के लिए मोबाइल से ट्रांजैक्शन करने की बात कही। हालांकि, दैनिक भास्कर ने उनके फोन-पे की हिस्ट्री देखी तो 15 से 21 सितंबर के बीच मनोज को रकम ट्रांसफर करने का कोई स्पष्ट ट्रांजैक्शन नहीं मिला। भुगतान को लेकर पिता के दावे और उपलब्ध रिकॉर्ड के बीच इस अंतर की भी जांच जरूरी है।
प्रत्यक्षदर्शी का आरोप- 15 से 20 मिनट तक पीटा प्रकाश के पड़ोसी और मनासा खुर्द निवासी ललित नागदा जयपुर में टैक्सी चलाते हैं। ललित के मुताबिक, 22 सितंबर की सुबह पुलिस उसे और उसके दोस्त प्रहलाद को हिरासत में लेकर होटल मालिक दिलीप सिंह के घर गई। वहां से दिलीप को भी हिरासत में लिया गया।
इसके बाद तीनों को मुहाना थाने ले जाया गया। ललित का दावा है कि कुछ देर बाद ऋतुराज बाहर से चलता हुआ थाने में आया और कहा कि पुलिसकर्मियों ने उसे बहुत मारा है। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने उन्हें आपस में बात करने से रोका और ऋतुराज के साथ मारपीट शुरू कर दी। ललित के मुताबिक, सादे कपड़ों में मौजूद तीन पुलिसकर्मियों ने ऋतुराज के बाल खींचे और मुंह व शरीर के अन्य हिस्सों पर वार किए।
आरोप है कि उसका सिर दीवार से टकराया और लोहे की कुर्सी से सिर पर वार किया गया। ललित का कहना है कि करीब 15 से 20 मिनट तक मारपीट होती रही। जब उसने पुलिसकर्मियों से इसकी वजह पूछी तो उसे भी थप्पड़ मारकर चुप रहने को कहा गया। ललित ने बताया कि शाम करीब 6 बजे पुलिस ऋतुराज को लकी अस्पताल लेकर पहुंची।
बाद में उसे नारायणा अस्पताल रेफर किया गया। पुलिसकर्मियों के कहने पर ललित ने परिवार को फोन कर उसकी तबीयत बिगड़ने की जानकारी दी। अस्पतालों में अलग-अलग नाम से भर्ती कराने का आरोप परिजन का आरोप है कि ऋतुराज को पहले लकी अस्पताल में ‘ऋषिराज’ और फिर नारायणा अस्पताल में ‘ऋतु’ नाम से भर्ती कराया गया।
परिवार का यह भी दावा है कि नारायणा अस्पताल में पुलिसकर्मियों ने डॉक्टरों को सांप के काटने की बात बताई। परिजन के मुताबिक, शरीर पर सांप के काटने का निशान नहीं था, इसके बावजूद उसे 10 एंटीवेनम इंजेक्शन दिए गए। 23 सितंबर की शाम करीब 6 बजे ऋतुराज को एसएमएस अस्पताल रेफर किया गया। वहां इलाज के दौरान 5 अक्टूबर को उसकी मौत हो गई।
जन्म प्रमाण-पत्र में उम्र 16 साल 9 महीने दैनिक भास्कर की पड़ताल में ऋतुराज की उम्र को लेकर दस्तावेजों में अंतर सामने आया। मंदसौर नगरपालिका से 22 मई 2013 को जारी जन्म प्रमाण-पत्र में उसकी जन्मतिथि 20 दिसंबर 2009 दर्ज है। इसके अनुसार, 22 सितंबर को मुहाना थाने लाए जाने के दिन उसकी उम्र 16 साल 9 महीने थी।
वहीं, पुलिस रिकॉर्ड में इस्तेमाल पैन कार्ड पर जन्मतिथि 25 दिसंबर 2007 दर्ज होने की बात सामने आई है। इस तारीख के आधार पर भी घटना के दिन उसकी उम्र 18 साल से कम थी। परिवार के मुताबिक, पैन कार्ड बैंक के रिकॉर्ड से लिया गया था, जहां ऋतुराज का अपनी मां के साथ संयुक्त खाता था। प्रकाश ने बताया कि ऋतुराज ने एक एजेंट के जरिए पासपोर्ट बनवाया था।
उम्र कम होने के कारण दस्तावेज बनवाने के लिए जन्मतिथि बदलने का विचार आया। उनके मुताबिक, पहले आधार कार्ड में जन्मतिथि बदली गई और फिर उसी आधार पर पैन कार्ड तथा पासपोर्ट बनवाए गए। एडवोकेट बोले-कानूनी कार्रवाई हो सकती है एडवोकेट माधव मित्र के अनुसार, जन्मतिथि निर्धारित करने में जन्म प्रमाण-पत्र अहम दस्तावेज है।
गलत जानकारी देकर दूसरे दस्तावेज बनवाने पर अलग कानूनी कार्रवाई हो सकती है, लेकिन इससे वास्तविक जन्मतिथि अपने आप नहीं बदल जाती। किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के तहत 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के साथ पुलिस की कार्रवाई और अभिरक्षा के लिए अलग प्रक्रिया निर्धारित है। यदि ऋतुराज की उम्र जन्म प्रमाण-पत्र के अनुसार 18 वर्ष से कम थी, तो उसे थाने लाने और अभिरक्षा में रखने की प्रक्रिया की वैधता भी जांच के दायरे में आएगी।
मां की शिकायत पर एफआईआर, न्यायिक जांच शुरू परिवार के वकील सोमराज पंवार ने बताया कि उन्होंने पोस्टमार्टम रिपोर्ट देखी है, जिसमें मौत का कारण सिर में चोट बताया जा रहा है। मृतक की मां हेमाबाई की शिकायत पर पुलिस ने धारा 115(2), 126(2), 127(2) और 140(3) के तहत प्रकरण दर्ज किया है। मामले में न्यायिक जांच शुरू हो चुकी है।
प्रकाश का आरोप है कि उनका पासपोर्ट अब भी क्राइम ब्रांच के पास है। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिसकर्मी उनकी पत्नी हेमाबाई और ललित को थाने ले गए थे तथा उनकी पत्नी से सादे कागज पर हस्ताक्षर करवाए गए। प्रकाश के मुताबिक, बेटे के अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान उन्होंने मनोज से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उसका मोबाइल लगातार स्विच ऑफ आता रहा।
ललित ने कहा कि पुलिस के खिलाफ बोलने के कारण उसे जयपुर में टैक्सी चलाने में डर लगने लगा था, इसलिए वह अपने गृह क्षेत्र लौट आया। साढ़े 3 लाख रुपए का भुगतान कर चुके थे प्रकाश का कहना है कि मनोज ने सोने की चेन के लिए 4 लाख रुपए दिए थे और वह करीब साढ़े 3 लाख रुपए का भुगतान कर चुके थे। फोन-पे हिस्ट्री में लेन-देन का स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं मिलने के कारण भुगतान के दावे की भी पुष्टि की जरूरत है।
जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि शिकायत में बताए गए 22 लाख रुपए के आरोप का आधार क्या था, पुलिस ने किस कानूनी प्रक्रिया के तहत लोगों को थाने लाया और ऋतुराज की तबीयत बिगड़ने के दौरान क्या हुआ। पुलिस का दावा- 22 लाख रुपए की शिकायत पर कार्रवाई कर रहे थे मुहाना थाना प्रभारी मुकेश खराड़िया ने मारपीट और टॉर्चर के आरोपों से इनकार किया है।
पुलिस के अनुसार, प्रकाश लोहार के खिलाफ दुबई से सस्ता सोना दिलाने के नाम पर करीब 22 लाख रुपए लेने की शिकायत मिली थी। इसी शिकायत के संबंध में कार्रवाई की जा रही थी।
📡 स्रोत: NewsData.io