माँ दुर्गा के तीसरे स्वरूप को माँ चंद्रघंटा क्यों कहा जाता है?
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नवरात्रि के तीसरे दिन माँ दुर्गा के तीसरे स्वरूप, माँ चंद्रघंटा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माँ पार्वती ने अपने मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र धारण किया, जिसके कारण उनका नाम चंद्रघंटा पड़ा।माँ चंद्रघंटा का स्वरूप दिव्य, तेजस्वी और शक्तिशाली है।
दस भुजाओं वाली माँ विभिन्न अस्त्र-शस्त्र धारण करती हैं और सिंह पर सवार होकर भक्तों को साहस और निर्भयता का संदेश देती हैं।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माँ चंद्रघंटा दुष्ट शक्तियों का नाश कर धर्म की रक्षा करती हैं। उनके घंटे की ध्वनि नकारात्मक शक्तियों को दूर करने और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने का प्रतीक मानी जाती है।माँ चंद्रघंटा का स्वरूप हमें सिखाता है कि जीवन में कितनी भी कठिनाइयाँ आएँ, हमें साहस, धैर्य और आत्मविश्वास के साथ उनका सामना करना चाहिए।