मां ज्वालामुखी के दरबार में उमड़ा आस्था का सैलाब
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ब्यावर की अरावली पहाड़ियों में स्थित प्राचीन मां ज्वालामुखी मंदिर में महाअष्टमी पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। विशेष आरती, माता के दर्शन और पूजा-अर्चना कर भक्तों ने सुख-समृद्धि की कामना की।
ब्यावर, 19 अक्टूबर। अरावली की पहाड़ियों के बीच विराजमान प्राचीन मां ज्वालामुखी मंदिर में महाअष्टमी के अवसर पर श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। ब्यावर से करीब चार किलोमीटर दूर डूंगरी रोड स्थित मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। भक्तों ने माता के जयकारे लगाते हुए पहाड़ी की सीढ़ियां चढ़कर दर्शन किए और विशेष आरती में शामिल होकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, अरावली की पहाड़ियों में मां ज्वालामुखी स्वयंभू रूप में प्रकट हुई थीं। मंदिर का इतिहास वर्ष 1845 से भी पुराना बताया जाता है। श्रद्धालुओं के बीच इस प्राचीन मंदिर के प्रति गहरी आस्था है और इसे क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है।
महाअष्टमी पर मंदिर में माता का विशेष शृंगार किया गया और विधि-विधान से आरती हुई। श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन कर प्रसाद चढ़ाया और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना की। दिनभर मंदिर परिसर में भक्तों की आवाजाही बनी रही।
मंदिर की परंपरा का संबंध ब्यावर के संस्थापक कर्नल डिक्सन से भी बताया जाता है। मंदिर के पुजारी परिवार के अनुसार, कर्नल डिक्सन ने दाधीच परिवार को मंदिर का पट्टा सौंपकर पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी दी थी। तभी से यह परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है। वर्तमान में मधुसूदन दाधीच का परिवार मंदिर में पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी निभा रहा है।
महाअष्टमी के अवसर पर ब्यावर के अन्य देवी मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भीड़ रही। अजमेर रोड स्थित दादीधाम, नीलकंठ महादेव तीर्थ परिसर के मां वैष्णो देवी धाम और सूरजपोल गेट के बाहर स्थित काली माता मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई।
श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। विभिन्न मंदिरों में प्रसाद वितरण और धार्मिक आयोजन भी हुए। महाअष्टमी के पर्व पर पूरे ब्यावर क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बना रहा।
बाइट — मधुसूदन दाधीच, पुजारी, ज्वालामुखी माता मंदिर
बाइट — राहुल दाधीच, सदस्य, मंदिर समिति