मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करना स्वस्थ समाज की पहली जरूरत : प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत
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राजस्थान विश्वविद्यालय में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम, रैली और साइकोड्रामा से दिया जागरूकता का संदेश
जयपुर, 12 अक्टूबर। राजस्थान विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग की ओर से विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कुलगुरु प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत ने मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य व्यक्ति के समग्र विकास का महत्वपूर्ण आधार है। बढ़ते शैक्षणिक दबाव, प्रतिस्पर्धा और सामाजिक चुनौतियों के बीच विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं पर खुलकर बात करना और जरूरत पड़ने पर सहायता लेना स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
प्रो. सारस्वत ने विद्यार्थियों से अपनी भावनाओं को समझने और परेशानियों को साझा करने का आह्वान किया। उन्होंने शिक्षकों से भी विद्यार्थियों की मनोदशा को समझने और उनकी समस्याओं के समाधान में सहयोग करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आसपास का वातावरण सकारात्मक बनाए रखना जरूरी है। यदि कोई व्यक्ति अपनी परेशानी लेकर बात करने आए, तो उसकी बात को ध्यानपूर्वक सुनना और समझना चाहिए। कई बार किसी की बात सुन लेने मात्र से भी उसके जीवन में सकारात्मक बदलाव आ सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को कक्षा में पढ़ाई के साथ जीवन से जुड़े अन्य विषयों पर भी संवाद करने और कठिन परिस्थितियों में अपनी बात खुलकर रखने की सलाह दी।
मनोविज्ञान विभाग की अध्यक्ष प्रो. प्रेरणा पुरी ने कार्यक्रम के उद्देश्यों की जानकारी देते हुए कहा कि इसका मकसद विद्यार्थियों और समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना, इससे जुड़े भ्रम और सामाजिक कलंक को दूर करना तथा जरूरत के समय मनोवैज्ञानिक सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित करना है। उन्होंने कहा कि तनाव, चिंता और भावनात्मक चुनौतियों पर समाज में खुलकर संवाद होना चाहिए। मानसिक स्वास्थ्य को केवल बीमारी तक सीमित न मानकर व्यक्ति के संपूर्ण जीवन और कल्याण से जोड़कर देखना जरूरी है।
कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि एवं पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. मनिका मोहन ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए सकारात्मक जीवनशैली अपनाने और प्रसन्न रहने का प्रयास करने पर जोर दिया। वहीं, विशिष्ट अतिथि एवं पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. ए.वी.एस. मदनावत ने मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल के लिए संतुलित भोजन और नियमित व्यायाम को आवश्यक बताया।
उन्होंने कहा कि स्वस्थ दिनचर्या से मन और मस्तिष्क को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है। कार्यक्रम के तहत पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता, भाषण, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता रैली और साइकोड्रामा का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने पोस्टरों और रचनात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का संदेश दिया।
जागरूकता रैली को कुलगुरु प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत, विभागाध्यक्ष प्रो. प्रेरणा पुरी और अन्य अतिथियों ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली के माध्यम से विश्वविद्यालय परिसर में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने और लोगों को जागरूक करने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में मनोविज्ञान विभाग के विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के साथ एनसीसी कैडेट्स और विभिन्न शिक्षण संस्थानों से आए करीब 250 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। इनमें यूनिवर्सिटी महारानी कॉलेज, यूनिवर्सिटी महाराजा कॉलेज, यूनिवर्सिटी राजस्थान कॉलेज, यूनिवर्सिटी कॉमर्स कॉलेज, सुबोध पीजी महिला महाविद्यालय, श्री भवानी निकेतन कॉलेज, कनोडिया महिला महाविद्यालय, जेवियर स्कूल और जेएनवी स्कूल, पावटा के विद्यार्थी शामिल रहे।
अतिथियों ने विद्यार्थियों को मनोविज्ञान के ज्ञान का उपयोग समाज के कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने में करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के आयोजन एवं समन्वय में डॉ. ज्योति की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस अवसर पर प्रो. रामवतार शर्मा, डॉ. चन्द्राणी सेन, डॉ. तेजेंदर कौर, प्रो.
रश्मि चौधरी, प्रो. उमा मित्तल, डॉ. आशिमा कट्टा, शालिनी खागारोत सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।