कल मनाया जाएगा हरतालिका तीज का त्यौहार
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कल हरतालिका तीज है। छत्तीसगढ़ में इस त्यौहार का विशेष महत्व है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती है। हरतालिका तीज के पर्व से एक दिन पहले छत्तीसगढ़ के हर घर में व्रत करने वाली महिलाओं द्वारा करेले की सब्जी और चावल खाने की विशेष परंपरा है। जिसे करूभात कहा जाता है। छत्तीसगढ़ी में ‘करू’ का अर्थ कड़वा यानि करेला और ‘भात’ का अर्थ पके हुए चावल से होता है।
इससे पहले, कल नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में तीजा-पोरा तिहार कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विणुदेव साय ने प्रदेशव्यापी ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान का शुभारंभ किया। उन्होंने राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ करते हुए पोस्टर का विमोचन किया और माताओं-बहनों को सुपोषण की शपथ दिलाई। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सुपोषण रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री निवास को छत्तीसगढ़ी गांव और मायके की तरह सजाया गया था। लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों के बीच माताओं-बहनों ने पूरे उत्साह के साथ तीजा-पोरा की खुशियां साझा कीं।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
हरतालिका तीज छत्तीसगढ़ में एक प्रमुख पारिवारिक त्योहार है, जिसमें महिलाएँ अपने पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इस दिन से पहले की रात को खास कर “करूभात” यानी कड़वे करेला और चावल का व्यंजन तैयार किया जाता है। यह परंपरा न केवल सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती है, बल्कि परिवारिक बंधनों को मजबूत करने का माध्यम भी है। इस खबर का महत्व इसलिए है क्योंकि यह क्षेत्रीय रीति-रिवाजों और पारिवारिक मूल्यों को उजागर करती है, जिससे ग्रामीण समाज में सांस्कृतिक गर्व और एकजुटता बढ़ती है। आम जनता के लिए यह
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
हरतालिका तीज के पावन पर्व पर, महिलाएँ अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं, परंतु यदि किसी रिश्ते में असहजता या हिंसा हो, तो संवाद और कानूनी सहायता से समाधान ढूंढना चाहिए। समाज में सहिष्णुता और समझ को बढ़ावा देकर, हम संघर्षों को सुलझाने के लिए शांतिपूर्ण मार्ग अपना सकते हैं। इस परंपरा का सच्चा अर्थ है एकजुटता और प्रेम, जो हमें एक स्वस्थ, समावेशी समाज की ओर ले जाए।