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मंडला - विश्व प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व से एक सुखद खबर सामने आई

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 17 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
मंडला - विश्व प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व से एक सुखद खबर सामने आई

कान्हा टाइगर रिजर्व में बारहसिंघा की संख्या हुई 1100

कभी विलुप्ति की कगार पर पहुंच गए थे बारहसिंघा

जुलाई से लेकर अक्टूबर तक 51 नवजातों बारहसिंघा ने लिया जन्म

बारहसिंघा को बड़ी संख्या में देखने आते है पर्यटक

कान्हा टाइगर रिजर्व में पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहता है बारहसिंघा

विश्व प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व से एक अच्छी सुखद खबर सामने आ रही है। वो बारहसिंघा जिसे पूरी दुनिया में संरक्षण और संवर्धन के लिए जाना जाता है और जो कान्हा टाइगर रिजर्व से विलुप्ति की कगार पर थे। वहां जुलाई से लेकर अक्टूबर माह तक 51 नवजातों बारहसिंघा ने जन्म लिया है। जिससे कान्हा की पहचान अब भी बरकरार रहेगी।

आज कान्हा में इनकी संख्या बढ़कर 1100 हो गई है। क्षेत्र संचालक रविंद्र मणि त्रिपाठी ने बताया कि इनके जन्म की प्रक्रिया जुलाई से शुरू होकर जनवरी-फरवरी तक चलती है। विलुप्ति की कगार से 1100 बारहसिंघा तक का ये सफर वन कर्मियों के जज्बे को सलाम है. जुलाई से लेकर अभी तक 51 नए छावनों यानि बारहसिंघा के बच्चे का जन्म हमारे लिए गर्व का विषय है।

कान्हा से सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बारहसिंघों को भेजा है। कान्हा नेशनल पार्क का गौरव बारहसिंघा जिसे पूरे संसार संरक्षण संवर्धन के लिए जाना जाता है। 1970 में इनकी संख्या घटकर सिर्फ 66 रह गई थी, लेकिन वाइल्ड लाइफ और वन विभाग के अथक प्रयासों, वैज्ञानिक प्रबंधन और सतत निगरानी ने चमत्कार कर दिखाया.

आज कान्हा में इनकी संख्या बढ़कर 1100 हो गई है। ये सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि संरक्षण की दुनिया की सबसे बड़ी सफलता की कहानी है. इनका नवजात छावना असहाय होता है। जिसकी सतत निगरानी रखरखाव कान्हा प्रबंधन द्वारा किया जाता है।

बाइट - रविंद्र मणि त्रिपाठी, क्षेत्र संचालक, कान्हा टाइगर रिजर्व

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।