मंडला- नक्सल प्रभावित रहे गांव में कान्हा ने बनाया बाल उद्यान, पर्यटन की कमाई से संवर रहा ग्रामीण विकास
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मंडला जिले के नक्सल प्रभावित रहे दूरस्थ गांवों तक अब विकास की रोशनी पहुंच रही है। कान्हा टाइगर रिजर्व के पर्यटन से होने वाली आय का लाभ स्थानीय ग्रामीणों को भी मिल रहा है। वन विभाग इको विकास समितियों के माध्यम से ग्रामीणों की जरूरतों के मुताबिक विकास कार्य करा रहा है। इसी पहल के तहत छत्तीसगढ़ सीमा से लगे कुकतीसरई गांव में बच्चों के लिए कान्हा बाल उद्यान तैयार किया गया है। वहीं गांव के मार्ग पर सोलर स्ट्रीट लाइट भी लगवाई गई हैं।
मंडला जिला मुख्यालय से करीब 100 किलोमीटर दूर स्थित कुकतीसरई गांव चारों तरफ से जंगलों से घिरा है। यहां वन्यप्राणियों की मौजूदगी के कारण बच्चों के लिए सुरक्षित खेल का स्थान उपलब्ध नहीं था। ग्रामीणों ने इको विकास समिति की बैठक में यह समस्या वन विभाग के सामने रखी। इसके बाद समिति की राशि से स्कूल के पास बाल उद्यान तैयार कराया गया। यहां बच्चों के लिए झूले, फिसलपट्टी और हरियाली की व्यवस्था की गई है।
कान्हा टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक रवींद्र मणि त्रिपाठी ने ग्रामीणों की मौजूदगी में उद्यान का शुभारंभ किया। इसकी देखरेख के लिए कान्हा बाल मित्र दल और बाघिन दीदी को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
दरअसल, कान्हा के प्रवेश टिकट से मिलने वाली आय का एक तिहाई हिस्सा इको विकास समिति को दिया जाता है। इसी राशि से गांवों में स्कूलों की मरम्मत, पुलिया, बाथरूम और दूसरी जरूरी सुविधाओं के काम कराए जाते हैं। कुकतीसरई में बाल उद्यान भी इसी राशि से बनाया गया है।
कान्हा प्रबंधन की इस पहल से साफ है कि पर्यटन से होने वाली कमाई केवल पार्क तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका लाभ दूरस्थ गांवों तक पहुंचाकर ग्रामीणों को वन और वन्यजीव संरक्षण से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
-------- बाइट 01- रवींद्र मणि त्रिपाठी, फील्ड डायरेक्टर, कान्हा टाइगर रिजर्व मंडला
बाइट 02- पूजा बघेल, वन परिक्षेत्र अधिकारी, मोतीनाला
बाइट 03- बुधराम धुर्वे, अध्यक्ष, ईको विकास समिति
----- • मंडला से 100 किमी दूर छत्तीसगढ़ सीमा के कुकतीसरई गांव में कान्हा बाल उद्यान तैयार।
• नक्सल प्रभावित रहे दुर्गम गांव में बच्चों को मिला सुरक्षित खेल का स्थान।
• इको विकास समिति की राशि से झूले, फिसलपट्टी और हरियाली की व्यवस्था।
• गांव तक पहुंच मार्ग पर सोलर स्ट्रीट लाइट लगाई गईं, रात में आवागमन होगा सुरक्षित।
• कान्हा के प्रवेश टिकट से मिलने वाली आय का एक तिहाई हिस्सा इको विकास समिति को मिलता है, इसी राशि से गांवों में विकास कार्य कराए जा रहे हैं।
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💡 पृष्ठभूमि (Background)
कान्हा टाइगर रिजर्व से उत्पन्न पर्यटन आय के जरिए मंडला जिले के नक्सल प्रभावित दूरस्थ गांवों में बाल उद्यान और सोलर प्रोजेक्ट जैसी विकास योजनाएँ लागू हो रही हैं। यह पहल वन विभाग की इको-डवलपमेंट समितियों के माध्यम से स्थानीय जरूरतों के अनुसार की गई है। इस खबर का महत्व यह है कि यह दिखाती है कि संघर्षग्रस्त इलाकों में भी सतत पर्यटन से आर्थिक सुधार संभव है। इससे आम जनता को रोज़गार के अवसर, शिक्षा और स्वच्छ ऊर्जा मिलती है, जिससे सामाजिक एवं आर्थिक स्थिरता बढ़ती है।