मणिपुर में हाईवे की नाकेबंदी हटने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका निपटाई, जरूरी सामान की सप्लाई बहाल
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मणिपुर में राष्ट्रीय राजमार्गों पर नाकेबंदी हटाए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कुकी वूमेन ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स की याचिका का निपटारा कर दिया है.
संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कुकी-जो बहुल इलाकों में लंबे समय से जारी आर्थिक नाकेबंदी को खत्म कराने और जरूरी सामान की आपूर्ति सामान्य कराने की मांग की थी.
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की.
सुनवाई के दौरान मणिपुर सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग-2 से नाकेबंदी हटा दी गई है और रास्ता खोल दिया गया है.
सरकार की ओर से स्थिति रिपोर्ट भी अदालत में दाखिल की गई.
सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, NH-2 पर आवाजाही बहाल होने के साथ प्रभावित इलाकों में जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति भी दोबारा शुरू हो गई है.
अदालत को यह भी बताया गया कि दूसरे राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों से भी नाकेबंदी हटाने की प्रक्रिया चल रही है.
इन घटनाक्रमों के बाद याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने माना कि मौजूदा परिस्थितियों में याचिका पर आगे आदेश की आवश्यकता नहीं रह गई है. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को निपटा दिया.
दरअसल, कुकी वूमेन ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था.
संगठन ने आरोप लगाया था कि मणिपुर के कांगपोकपी जिले के कुकी-जो आबादी वाले इलाकों में लंबे समय से जारी नाकेबंदी की वजह से आम लोगों को भोजन, ईंधन और दवाइयों जैसी जरूरी चीजों की कमी का सामना करना पड़ रहा है.
याचिका में राष्ट्रीय राजमार्ग-2 को विशेष तौर पर महत्वपूर्ण बताया गया था। यह मार्ग इंफाल को दीमापुर से जोड़ता है और मणिपुर में आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही के लिए अहम रास्तों में शामिल है.
याचिकाकर्ता के मुताबिक, सड़क मार्ग बाधित होने से प्रभावित इलाकों तक जरूरी सामान पहुंचाने में मुश्किलें पैदा हो रही थीं.
मामले की पिछली सुनवाई के दौरान भी सुप्रीम कोर्ट ने हाईवे बंद रहने के आम लोगों पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता जताई थी। अगस्त में अदालत ने मणिपुर के विभिन्न पक्षों से सभी बंद राजमार्गों को दोबारा खोलने के लिए एक व्यापक प्रस्ताव तैयार करने को कहा था.
अदालत ने उस दौरान यह भी कहा था कि राजमार्ग आम लोगों के लिए जीवनरेखा की तरह हैं और नाकेबंदी से किसी भी पक्ष को लाभ नहीं होता.
पीठ ने उस समय यह भी स्पष्ट किया था कि मामले में सीधे और व्यापक निर्देश देने से पहले जमीन पर मौजूद परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है.
अदालत ने आशंका जताई थी कि अगर राज्य की ओर से किसी तरह का हस्तक्षेप हिंसक प्रतिक्रिया का कारण बनता है तो इसका असर निर्दोष लोगों पर पड़ सकता है.
इसलिए कोर्ट ने संबंधित पक्षों से व्यावहारिक समाधान का प्रस्ताव देने को कहा था.
कुकी संगठन की याचिका में यह भी कहा गया था कि कथित आर्थिक नाकेबंदी ने आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों को प्रभावित किया.
संगठन के मुताबिक, खाद्य सामग्री, पेट्रोलियम उत्पाद और दवाओं की आपूर्ति बाधित होने से मानवीय संकट जैसी स्थिति पैदा हुई.
हालांकि, ये याचिका में लगाए गए आरोप थे और अदालत ने मौजूदा स्थिति को देखते हुए याचिका का निपटारा किया है.
दरअसल रिपोर्ट के अनुसार, नाकेबंदी से जुड़े घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में मई 2026 में हुई हिंसक घटनाएं भी थीं. 13 मई को कांगपोकपी जिले में कुकी-जो समुदाय से जुड़े चर्च नेताओं के एक समूह पर कथित घात लगाकर हमला किया गया था, जिसमें तीन लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने की बात सामने आई थी.
इसके बाद इलाके में तनाव बढ़ा और विभिन्न मार्गों पर नाकेबंदी से जुड़ी स्थिति बनी.
अब मणिपुर सरकार की ओर से NH-2 खुलने और जरूरी सामान की सप्लाई बहाल होने की जानकारी मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले को समाप्त कर दिया है.
हालांकि, दूसरे राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर नाकेबंदी हटाने की प्रक्रिया को लेकर सरकार की स्थिति रिपोर्ट में दी गई जानकारी महत्वपूर्ण रहेगी,
📡 स्रोत: NewsData.io