मणिपुर में हिंसा भड़की, 5 की मौत:उग्रवादियों ने पुलिस स्टेशन, घर जलाए; इस साल हुई घटनाओं में 40 से ज्यादा मौतें
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मणिपुर के कामजोंग और उखरुल में शनिवार को हथियारबंद गुटों के बीच हुई झड़पों में एक महिला समेत पांच लोगों की मौत हो गई। हालांकि पूर्व सीएम बीरेन सिंह का दावा है कि 7 लोग मारे गए हैं, वहीं एक पुलिस स्टेशन जला दिया गया है। नगा-बहुल कामजोंग के कुकी-बहुल चसाड गांव में 22 साल के एक युवक और 42 साल की एक महिला की मौत हो गई।
महिला को गोली मारी गई थी। उसकी हत्या के बाद शुक्रवार रात से कुकी और नगा हथियारबंद गुटों के बीच गोलीबारी शुरू हो गई, जो शनिवार सुबह तक जारी रही। इस दौरान 10 घरों में आग भी लगा दी गई। फरवरी में मणिपुर में दोबारा शुरू हुई हिंसा की घटनाओं से लेकर अब तक करीब 40 लोगों की मौत हो चुकी है। हिंसा की घटनाएं उखरुल, कामजोंग, कांगपोकपी, तामेंगलोंग और नोनी के साथ-साथ सेनापति के कुछ हिस्सों में हुई है।
म्यांमार बॉर्डर की तरफ भागे हमलावर एक अलग घटना में कामजोंग में म्यांमार सीमा के पास स्थित तांगखुल नगा बस्ती 'निंगचो' गांव में संदिग्ध उग्रवादी घुस आए और गोलीबारी शुरू कर दी। गोली लगने से दो लोगों की मौत हो गई, जिनकी पहचान 35 साल के नगाचांसो निंगशेन और 48 साल के लेशिशान लेशडांग के तौर पर हुई है।
घटना के बाद सुरक्षा बल गांव पहुंचे और हालात को काबू में किया। ग्रामीणों का दावा है कि गोलीबारी के बाद हमलावर म्यांमार की तरफ भाग गए। ज़िला प्रशासन ने और हिंसा को रोकने के लिए चसाड पुलिस गेट जंक्शन के 400 मीटर के दायरे में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 162 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी।
फरवरी से 10 अक्टूबर तक की प्रमुख घटनाएं 7–11 फरवरी: उखरुल मामूली झगड़े से हिंसा फैली उखरुल जिले के लितान इलाके में 7 फरवरी की रात दो तांगखुल नगा और दो कुकी युवकों के बीच झगड़ा हुआ। अगले दिन एक कुकी परिवार के खाली घर में आग लगाई गई। आरोपियों को सौंपने की मांग के बाद तनाव बढ़ा, पत्थरबाजी और गोलीबारी हुई।
कई घर जला दिए गए और प्रशासन ने कर्फ्यू तथा इंटरनेट प्रतिबंध जैसे कदम उठाए। 24–25 अप्रैल: गोलीबारी में तीन लोगों की मौत उखरुल के सिनाकीथेल और मुल्लम गांवों के पास दो अलग-अलग गोलीबारी की घटनाओं में कम से कम तीन लोगों की मौत की खबर आई। इनमें तांगखुल नगा समुदाय का एक व्यक्ति भी शामिल था।
इससे दोनों समुदायों के बीच तनाव और बढ़ा। 7–8 मई: उखरुल और कामजोंग के गांवों पर हमले और आगजनी उखरुल और कामजों
📡 स्रोत: Dainik Bhaskar
💡 पृष्ठभूमि (Background)
मणिपुर के कामजोंग और उखरुल में हथियारबंद गुटों के बीच झड़पों से पाँच लोगों की मौत और एक पुलिस स्टेशन जलाने जैसी घटनाएँ हुईं, जिससे राज्य में बढ़ती हिंसा का पता चलता है। यह विषय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह नगा और कुकी समुदायों के बीच गहरी जातीय तनाव को उजागर करता है, जो पहले से ही राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक समस्याओं से जूझ रहा है। आम जनता पर इसका असर दोहरा है: पहले तो नागरिकों की सुरक्षा की चिंता बढ़ेगी, और दूसरे, यदि सरकार समय पर कदम नहीं उठाती है तो सामाजिक असमानता और दंगों का खतरा बढ़ सकता
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
मणिपुर की इस दुखद घटना से हमें यह सीख मिलती है कि हिंसा कभी समाधान नहीं देती। समाज में मतभेदों को संवाद, कानून और सहानुभूति से सुलझाना चाहिए। संघर्ष के समय शांत मन से मध्यस्थता और न्यायिक प्रक्रिया का सहारा लें। पीड़ितों के परिवारों को सहारा दें और शांति की दिशा में मिलकर कदम बढ़ाएँ। केवल शांति से ही हम एक समृद्ध, समावेशी समाज बना सकते हैं।