अपराध

मणिपुर में कुकी-नगा समुदायों के बीच गोलीबारी, 1 की मौत:4 घायल; म्यांमार के उग्रवादियों पर हमले का आरोप, 8 महीने में 50 से ज्यादा मौतें

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 18 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
मणिपुर में कुकी-नगा समुदायों के बीच गोलीबारी, 1 की मौत:4 घायल; म्यांमार के उग्रवादियों पर हमले का आरोप, 8 महीने में 50 से ज्यादा मौतें

मणिपुर के कामजोंग जिले के चस्साद गांव में शनिवार को कुकी और नगा समुदायों के हथियारबंद समूहों के बीच गोलीबारी हुई। इसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि चार लोग घायल हो गए। पुलिस अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि हमले के पीछे नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड-इसाक मुइवा (NSCN-IM) और म्यांमार के तांगखुल उग्रवादी थे।

हालांकि, इन आरोपों की अभी पुष्टि नहीं हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फरवरी से अब तक 50 से ज्यादा आम नागरिक मारे जा चुके हैं। इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। दोनों पक्षों के बीच गोलीबारी शाम तक जारी रही पुलिस के मुताबिक, शनिवार दोपहर करीब 2:30 बजे दोनों पक्षों के बीच गोलीबारी शुरू हुई, जो शाम तक जारी रही।

इसमें गांव के मुखिया थंगजाहौ हाओकिप समेत खाइलुन हाओकिप, सेइखोहौ हाओकिप, हेगिन हाओकिप और सेइपाओ हाओकिप घायल हो गए। असम राइफल्स के जवानों ने सभी घायलों को बचाकर अर्धसैनिक बल के अस्पताल में भर्ती कराया। हालांकि, इलाज के दौरान सेइखोहौ हाओकिप की मौत हो गई। बाकी घायलों का इलाज जारी है। कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी (CoTU) ने चस्साद गांव पर हुए हमले की निंदा की है।

संगठन ने राज्य सरकार से इलाके में केंद्रीय सुरक्षा बलों को तैनात करने की मांग की है। इस मामले में सरकार की ओर से अभी कोई बयान नहीं आया है। फरवरी से कई जिलों तक फैला संघर्ष नगा और कुकी समुदायों के बीच संघर्ष पहले उखरुल जिले तक सीमित था, लेकिन अब यह सेनापति, तामेंगलांग और अन्य जिलों तक फैल चुका है।

दोनों समुदाय एक-दूसरे पर उग्रवादियों को पनाह देने और इलाके में वर्चस्व कायम करने के आरोप लगा रहे हैं। फरवरी में हिंसा दोबारा शुरू होने के बाद से उखरुल, कामजोंग, कांगपोकपी, तामेंगलांग और नोनी समेत कई इलाकों में घटनाएं हुई हैं। इस हिंसा में 50 से अधिक लोगों की मौत और दर्जनों घरों में आगजनी की खबरें सामने आई हैं।

इससे पहले मणिपुर में इम्फाल घाटी के मैतेई और आसपास के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा में 300 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। 49 लोग लापता हुए थे और हजारों लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े थे।

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

📰 पूरी खबर पढ़ें (Dainik Bhaskar पर जाएं)

🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत

हिंसा के क्षणों में, संवाद और सहानुभूति सबसे सशक्त हथियार हैं। जब विवाद उभरें, तो शांतिपूर्ण मध्यस्थता और कानूनी मार्ग अपनाएँ, न कि बंदूकें। समाज को एकजुट करने के लिए, विविधता को स्वीकारें और समान अधिकारों के लिए मिलकर कार्य करें। पीड़ितों के प्रति गहरी संवेदना रखें, उनकी सहायता के लिए त्वरित और मानवीय कदम उठाएँ। केवल शांतिपूर्ण प्रयासों से ही हम स्थायी शांति की नींव रख सकते हैं।

J
JKS News Desk

वॉयस ऑफ क्रांति की संपादकीय टीम आपके लिए भोपाल, मध्यप्रदेश और देश की सटीक और विश्वसनीय समाचार प्रस्तुत करती है।