मणिपुरी म्यूजिशियन हत्याकांड: PC में भावुक पत्नी बोली, 'हमें बदला नहीं...'
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
मणिपुर के म्यूजिशियन चोंगथम विक्रम सिंह की हत्या मामले में उनकी पत्नी जोशना चोंगथम ने भावुक बयान जारी किया है. उन्होंने कहा कि वह बदला नहीं बल्कि न्याय चाहती हैं.
चोंगथम ने कहा, 'मैं अभी भी अपने पति की मौत के सदमे से उबरने की कोशिश कर रही हूं.
उनकी अचानक मौत ने ऐसा दुख दिया है, जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है.
उन्होंने आगे कहा, ' वह मेरे पति, मेरे बच्चे के पिता, एक बेटे और भाई, एक संगीतकार और मेरे परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों के प्रिय व्यक्ति थे.
इस कठिन समय में जिस तरह से परिवार, दोस्तों और देशभर के लोगों से मिले प्यार और सहानुभूति मिली है, उसके लिए हम तहे दिल से आभारी हैं.
साथ ही दिल्ली पुलिस, नेताओं ने जिस तरह सहयोग दिया उसके लिए भी धन्यवाद देते हैं.'
निष्पक्ष जांच की मांग की
चोंगथम ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि इस कठिन मय में उनके परिवार को शांति और एकांत में शोक मनाने दिया जाए.
उन्होंने अधिकारियों से यह भी निवेदन किया कि मामले की जांच निष्पक्ष और न्यायपूर्ण की जाए और कानून के तहत सभी जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाए. उन्होंने कहा कि हम बदला नहीं चाहते हैं, हम न्याय चाहते हैं.
'दोबारा किसी के साथ ऐसा न हो'
चोंगथम विक्रम सिंह को याद करते हुए उन्होंने कहा, 'उनका एक नाम था, एक परिवार था और एक ऐसा जीवन था, जिसका महत्व था. हम केवल यही निवेदन करते हैं कि उनकी स्मृति का सम्मान किया जाए.
हमारे शोक को गरिमा दी जाए और न्याय मिले और दोबारा किसी और के परिवार के साथ ऐसा न हो.'
💡 पृष्ठभूमि (Background)
मणिपुर के एक प्रसिद्ध म्यूजिशियन, चोंगथम विक्रम सिंह, की हत्या के मामले में उनकी पत्नी जोशना चोंगथम ने भावुक बयान दिया है। यह घटना न सिर्फ एक व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि संगीत जगत और समाज में न्याय एवं सुरक्षा के सवाल उठाती है। इस खबर का महत्व इसलिए है क्योंकि यह दिखाती है कि कैसे एक सार्वजनिक व्यक्ति की मृत्यु समाज में गहरी भावनाएँ जगाती है और न्याय के प्रति लोगों की अपेक्षाएँ बढ़ाती है। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि लोग अपराध रोकथाम, कलाकारों की सुरक्षा और न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शित
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
हिंसा का कोई वैध रास्ता नहीं है। जब किसी के दिल में गुस्सा या दुख हो, तो कानूनी माध्यमों, मध्यस्थता और परामर्श का सहारा लें। समाज को सहानुभूति, संवाद और न्याय की संस्कृति अपनानी चाहिए। पीड़ितों के प्रति संवेदना दिखाते हुए, हमें एकजुट होकर ऐसे कार्यों को रोकने का संकल्प लेना चाहिए।