मंत्री के बेटे और भाई की एक वार्ड से दावेदारी:अटरू पालिका में वार्ड पांच से परिवार के दो लोगों ने आवेदन भरा, गरमाई राजनीति
प्रदेश के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के गृह क्षेत्र अटरू में पहली बार होने जा रहे नगर पालिका चुनाव ने टिकट वितरण से पहले ही सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। चुनाव में रोमांच तब अपने चरम पर पहुंच गया जब खुद शिक्षा मंत्री के परिवार से चाचा और भतीजे ने एक ही वार्ड से भाजपा का टिकट मांग कर सबको चौंका दिया।
यह दिलचस्प मुकाबला अब पूरे जिले में चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है। अटरू नगर पालिका के गठन के बाद यह पहला मौका है जब यहां चुनाव हो रहे हैं। पालिकाध्यक्ष का पद अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग के लिए आरक्षित है, जिसके चलते अध्यक्ष पद की कुर्सी पाने के लिए दिग्गजों ने अभी से अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है।
इसी कड़ी में, वार्ड नंबर 5 से टिकट के लिए जो नाम सामने आए हैं, वे सीधे तौर पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के परिवार से जुड़े हैं। इनमें कृष्णमुरारी दिलावर जो कि शिक्षा मंत्री के छोटे भाई हैं, जो चरड़ाना से लगातार 3 बार सरपंच रह चुके हैं और लंबे समय से इस वार्ड से चुनाव की तैयारी कर रहे थे।
वहीं पवन दिलावर जो शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के बेटे है, ने अपने चाचा के सामने ही इसी वार्ड से भाजपा टिकट के लिए आधिकारिक आवेदन कर दिया है। टिकटों पर जबरदस्त खींचतान अटरू नगरपालिका के कुल 25 वार्ड पार्षदों के लिए राजनीतिक दलों में टिकट पाने की होड़ मची हुई है। भाजपा को 25 वार्डों के लिए 110 आवेदन मिले हैं।
कांग्रेस को इन्हीं वार्डों के लिए 248 आवेदन प्राप्त हुए हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ-साथ कई प्रभावशालियों ने 'जिताऊ वार्ड' से टिकट पाने के लिए जोर लगाना शुरू कर दिया है, जिससे पार्टी के स्थानीय नेतृत्व के लिए भी चयन करना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
यह बोले जिम्मेदार अटरू मंडल अध्यक्ष पवन गंदोलिया ने बताया कि शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के छोटे भाई कृष्ण मुरारी दिलावर और उनके पुत्र पवन दिलावर दोनों ने ही अटरू नगर पालिका के वार्ड नंबर 5 से पार्षद पद के लिए भारतीय जनता पार्टी से टिकट का आवेदन किया है।
वहीं अपनी दावेदारी पर बात करते हुए कृष्णमुरारी दिलावर ने आत्मविश्वास जताया है। उनका कहना है कि जनता ने उन्हें पहले भी लगातार तीन बार सरपंच चुनकर अपनी सेवा का मौका दिया है। अगर पार्टी उन पर भरोसा जताती है, तो वे चुनाव जीतकर अटरू में भाजपा का बोर्ड बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या पार्टी परिवार के दोनों सदस्यों में से किसी एक को चुनती है या फिर इस हाई-प्रोफाइल सीट पर सियासी समीकरण साधने के लिए कोई नया रास्ता निकाला जाता है।
📡 स्रोत: NewsData.io