राजनीति

मंत्री की सब्सिडी का बोझ पॉलीहाउस किसान क्यों उठाएं? NHB के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन, जवाब की मांग

लेखक: Yogi अंतिम अपडेट: 25 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
मंत्री की सब्सिडी का बोझ पॉलीहाउस किसान क्यों उठाएं? NHB के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन, जवाब की मांग

नई GOC जारी नहीं होने और 21 अगस्त के सर्कुलर को लेकर किसानों में नाराजगी, 10 राज्यों के किसानों ने 11 शहरों में उठाई आवाज

भोपाल। नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड (NHB) की पॉलीहाउस योजना में सहायता राशि और पात्रता से जुड़े नए नियमों के विरोध में देशभर के पॉलीहाउस किसानों का आंदोलन अब NHB के क्षेत्रीय कार्यालयों तक पहुंच गया है। किसानों और उद्योग प्रतिनिधियों के अनुसार 10 राज्यों के किसानों ने 11 शहरों में साझा अभियान के तहत शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर NHB की कार्यप्रणाली और 21 अगस्त को जारी सर्कुलर को लेकर सवाल उठाए हैं।

किसानों का आरोप है कि जून से NHB की ओर से पॉलीहाउस परियोजनाओं के लिए नई GOC जारी नहीं की गई है और नई GOC के आवेदन की प्रक्रिया भी बंद है। उनका कहना है कि इससे योजना के तहत नई परियोजनाएं शुरू करने की तैयारी कर रहे किसान अटक गए हैं। वहीं, पहले से बैंक ऋण की मंजूरी प्राप्त कर चुके किसानों के सामने भी समय सीमा और वित्तीय दायित्वों को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है।

किसानों और पॉलीहाउस उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि NHB से संबंधित नई परियोजनाओं की प्रक्रिया प्रभावित होने से ग्रीनहाउस निर्माता, फिल्म और नेट सप्लायर तथा निर्माण से जुड़ी टीमें भी प्रभावित हो रही हैं। उनका दावा है कि यदि प्रक्रिया में और देरी हुई तो कुछ किसानों की बैंक ऋण मंजूरी की अवधि समाप्त हो सकती है। ऐसी स्थिति में ऋण का दोबारा मूल्यांकन या बैंक की शर्तों के अनुसार मंजूरी रद्द होने की आशंका भी जताई गई है।

इस मुद्दे को लेकर अहमदाबाद, जयपुर, भोपाल, लखनऊ, बेंगलुरु, देहरादून, चंडीगढ़, रायपुर, चेन्नई, पुणे और नाशिक में प्रदर्शन किए गए। आयोजकों के अनुसार अभियान में पॉलीहाउस किसानों के साथ ग्रीनहाउस निर्माता, फिल्म एवं नेट आपूर्तिकर्ता तथा निर्माण टीमों से जुड़े लोग भी शामिल हुए।

प्रदर्शन के दौरान किसानों ने NHB से 21 अगस्त के सर्कुलर को वापस लेने, पॉलीहाउस परियोजनाओं के लिए 50 प्रतिशत सहायता बहाल करने और भविष्य में नियमों में बदलाव से पहले किसानों तथा उद्योग से जुड़े हितधारकों के साथ चर्चा करने की मांग की। किसानों ने यह भी मांग रखी कि NHB स्वीकृत परियोजनाओं और जारी की गई GOC के आंकड़े सार्वजनिक करे तथा लंबित मामलों के निपटारे के लिए समयबद्ध प्रक्रिया बहाल की जाए।

किसानों का कहना है कि विरोध केवल नई परियोजनाओं तक सीमित नहीं है। इसमें GOC का इंतजार कर रहे आवेदकों, बैंक ऋण स्वीकृत करा चुके किसानों, निर्माणाधीन परियोजनाओं और सहायता राशि की प्रतीक्षा कर रहे तैयार फार्मों की समस्याएं भी शामिल हैं। किसानों का सवाल है कि सरकारी प्रक्रिया में हुई देरी या नियमों में बदलाव का आर्थिक बोझ उन लोगों पर क्यों डाला जाए, जिन्होंने पहले से निवेश की तैयारी कर रखी है।

आंदोलनकारियों ने पुराने निवेशों को सुरक्षित रखने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि 21 अगस्त से पहले पात्र पाए गए आवेदन, जारी या लंबित GOC तथा उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर बने वित्तीय दायित्वों को पुरानी व्यवस्था के अनुसार सुरक्षित रखा जाना चाहिए। इसके अलावा ऋण स्वीकृति से लेकर निर्माण, निरीक्षण और अंतिम दावा प्रस्तुत करने तक प्रत्येक चरण के नियम स्पष्ट रूप से लिखित में उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

किसानों के अनुसार यदि प्रशासनिक देरी के कारण बैंक ऋण की समयसीमा, निर्माण पूरा करने या अनुपालन की निर्धारित अवधि प्रभावित हुई है तो उन्हें उचित अतिरिक्त समय दिया जाना चाहिए।

आयोजकों ने NHB को सात दिन में लिखित जवाब देने और 21 अगस्त के सर्कुलर को वापस लेने का अल्टीमेटम दिया है। मांगों पर समाधान नहीं होने की स्थिति में किसानों ने गुरुग्राम स्थित NHB मुख्यालय पर दोबारा शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है। आयोजकों ने इसे 15-16 सितंबर को हुई लामबंदी की अगली कड़ी बताया है। उनके अनुसार 15 सितंबर को गुरुग्राम में प्रदर्शन और 16 सितंबर को कृषि मंत्रालय के समक्ष अपनी बात रखने के बाद अब किसानों की नजर NHB की अगली कार्रवाई पर है।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

पॉलीहाउस किसानों ने नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड (NHB) की नई सहायता राशि और पात्रता नियमों के खिलाफ प्रदर्शन किया। यह विषय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि NHB के निर्णय से सीधे किसानों की आय और उत्पादन लागत प्रभावित होती है, और नई नीतियाँ किसानों के लिए अनुकूल नहीं मानी जा रही हैं। यदि सरकार ने इन नियमों को बदला नहीं, तो किसानों की आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है, जिससे कृषि उत्पादन में गिरावट और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

Y
Yogi

वॉयस ऑफ क्रांति की संपादकीय टीम आपके लिए भोपाल, मध्यप्रदेश और देश की सटीक और विश्वसनीय समाचार प्रस्तुत करती है।