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'मरना पसंद करूंगा, डरपोक जज कहलाना नहीं’:36 दोषियों को फांसी सुनाने वाले यूपी के जज ने लिखा- डरने से अच्छा इस्तीफा दे दूं

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 8 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
'मरना पसंद करूंगा, डरपोक जज कहलाना नहीं’:36 दोषियों को फांसी सुनाने वाले यूपी के जज ने लिखा- डरने से अच्छा इस्तीफा दे दूं

'मैं मरना पंसद करूंगा, डरपोक जज कहलवाना नही। जब तक मैं अपने सिद्धांतों पर चल सकता हूं। तब तक सर्विस करूंगा वरना इस्तीफा दे दूंगा। जब तक मैं जज की कुर्सी पर हूं तो फैसला लेने का अधिकार भी एकमात्र मेरा ही होगा। मुझे माता-पिता ने शुरू से सिखाया है कि भगवान से डरो, किसी और से नहीं। अगर मैं किसी और से डरूंगा तो जनता का भरोसा कोर्ट से उठ जाएगा।

मैं माफियाओं से डरने लगूंगा तो इस पवित्र न्यायिक संस्था से इस्तीफा देना ही ठीक रहेगा।' यह टिप्पणी सोमवार को मुजफ्फरनगर में जज रवि कुमार दिवाकर ने शाहपुर शहजादी हत्याकांड में पति नदीम को फांसी की सजा सुनाते हुए अपने फैसले में लिखी। कोर्ट ने नदीम पर 1 लाख जुर्माना भी लगाया। रवि कुमार दिवाकर वही जज हैं, जिन्होंने अपनी 17 साल की न्यायिक सेवा में 36 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है।

सिर्फ मुजफ्फरनगर में उन्होंने 5 महीने में 23 दोषियों को मृत्युदंड दिया है। पिछले महीने जिला जज ने उनकी कोर्ट से करीब 100 मुकदमों को रिकॉल कर दूसरी अदालतों में ट्रांसफर कर दिया था। फैसले में लिखीं जज रवि कुमार दिवाकर की बड़ी टिप्पणियां- 1.

मुजफ्फरनगर में गैंगस्टर और माफियाओं का आतंक था

जज ने लिखा- मुजफ्फरनगर में भरी अदालत में विक्की त्यागी की हत्या कर दी गई थी। इससे इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां अपराधियों को कानून का कोई डर नहीं था। एक समय शौकीन गैंग का आतंक हुआ करता था। हाल ही में इसी कोर्ट ने शौकीन के भाई शाहनवाज को फांसी की सजा दी गई है। 2.

ज्ञानवापी मामले के बाद परिवार को भी धमकियां मिलीं

जज ने फैसले में कहा- वाराणसी के ज्ञानवापी मामले के बाद मुझे और परिवारवालों को कई बार जान से मारने की धमकी मिली। अंततरराष्ट्रीय स्तर से भी धमकियां दी गईं। एक आरोपी अदनान खान ने इंस्टाग्राम अकाउंट पर धमकी दी थी कि काफिर का खून तुम्हारे लिए हलाल है, जो तुम्हारे दीन के खिलाफ लड़ रहे हैं। मेरी फोटो लगाकर आंखों के ऊपर लाल रंग से काफिर लिखा था। 3.

इस वक्त बोलना ठीक नहीं, पद की भी मर्यादा होती है

जज ने लिखा- इस वक्त मैं कुछ व्यवहार से बहुत दुखी हूं। कोई व्यक्ति दुनिया को बेवकूफ बना सकता है, लेकिन अपनी अंतरात्मा को नहीं। ऐसे बर्ताव की वजह माफियाओं, गैंगस्टरों और अपराधियों को बचाना है। ऐसा क्यों हुआ, मैं यह भी जानता हूं। लेकिन, इस वक्त बोलना ठीक नहीं होगा, क्योंकि

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत

जज के शब्द हमें यह सिखाते हैं कि न्याय की राह पर चलने के लिए साहस और सत्यनिष्ठा अनिवार्य हैं। जब समाज में किसी भी प्रकार का दमन या भ्रष्टाचार हो, तो हमें कानूनी मार्ग अपनाना चाहिए, न कि हिंसा या डर। पीड़ितों के प्रति संवेदना रखकर, हमें शांतिपूर्ण तरीकों से न्याय की माँग करनी चाहिए, जिससे विश्वास और न्याय की पवित्रता बनी रहे।

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