भोपाल

मसाजिद कमेटी में नियमों की अनदेखी के आरोप, नियुक्तियों और संपत्तियों की जांच की मांग

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 11 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
मसाजिद कमेटी में नियमों की अनदेखी के आरोप, नियुक्तियों और संपत्तियों की जांच की मांग

भोपाल। शहर मुफ्ती अबुल कलाम कासमी की आय और संपत्तियों को लेकर लोकायुक्त कार्यालय भोपाल में शिकायत प्रस्तुत की गई है। शिकायतकर्ता ओसाफ अली ने आय से अधिक संपत्ति की जांच के साथ संबंधित संपत्तियों के स्रोत और परिवार के सदस्यों के नाम दर्ज संपत्तियों की भी जांच कराने की मांग की है।

शिकायत में मसाजिद कमेटी में नियुक्तियों और पदों पर बने रहने के नियमों की भी समीक्षा की मांग की गई है। ओसाफ अली का कहना है कि मसाजिद कमेटी में नियुक्तियां शासन स्तर से होती हैं, इसलिए यह जांच जरूरी है कि नियुक्तियों में निर्धारित नियमों और मापदंडों का पालन किया जा रहा है या नहीं।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि कमेटी में कुछ कर्मचारी 70 वर्ष या उससे अधिक उम्र के होने के बावजूद पदों पर बने हुए हैं। उन्होंने निर्धारित सेवानिवृत्ति नियमों के पालन की मांग करते हुए कहा कि पदों पर लंबे समय तक बने रहने के बजाय शासन के नियमों के अनुसार योग्य लोगों को अवसर मिलना चाहिए।

शिकायत में मसाजिद कमेटी की जमीन और उससे जुड़ी संपत्तियों की भी जांच की मांग की गई है। इसमें कमेटी की आय, संपत्तियों के स्रोत, जमीन और भवनों से संबंधित दस्तावेजों तथा परिवार के सदस्यों के नाम दर्ज संपत्तियों की जानकारी की जांच कराने की मांग शामिल है।

ओसाफ अली ने कहा कि मामले को लेकर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू), वल्लभ भवन और संबंधित अल्पसंख्यक विभाग के समक्ष भी शिकायत प्रस्तुत की जाएगी। उन्होंने नियुक्तियों, कार्यकाल, वेतन और सेवानिवृत्ति संबंधी नियमों की जांच की मांग की है।

उन्होंने कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जांच के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। शिकायतकर्ता ने शहर मुफ्ती के पद से इस्तीफे की मांग भी दोहराई है।

फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में संबंधित विभाग और अधिकारियों की जांच तथा उनका पक्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

मसाजिद कमेटी में नियमों की अनदेखी और आय-सम्पत्ति के सवाल पर भोपाल में शिकायत दर्ज हुई है। यह विषय मसाजिद के प्रबंधन और पारदर्शिता पर प्रकाश डालता है, जहाँ नियुक्तियाँ और पदस्थापन पर नियमों का पालन न होने की आशंका है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि धार्मिक संस्थाओं की संपत्ति और प्रबंधन पर जनता का भरोसा बना रहता है, और किसी भी दुरुपयोग से समाज में असंतोष बढ़ सकता है। यदि जांच के बाद नियम लागू होते हैं, तो यह पारदर्शिता बढ़ाएगा और अन्य धार्मिक निकायों के लिए मिसाल बनेगा, जिससे जनता का विश्वास सुदृढ़

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।