मतदाता सूची में बदलाव पर कांग्रेस का बड़ा आंदोलन, 28 को भोपाल में निर्वाचन सदन का घेराव; 29 को जिलों में प्रदर्शन
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →जीतू पटवारी बोले- मतदाता सूची से हटाए गए 34.25 लाख नामों का विधानसभा, जिला और कारणवार विवरण सार्वजनिक करे निर्वाचन आयोग
भोपाल, 24 सितंबर 2026। मध्यप्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर कांग्रेस ने प्रदेशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि 28 सितंबर को भोपाल स्थित मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय का घेराव किया जाएगा, जबकि 29 सितंबर को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर जिला निर्वाचन अधिकारी कार्यालयों का घेराव कर प्रदर्शन किया जाएगा।
प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में पटवारी ने कहा कि कांग्रेस पिछले करीब दो वर्षों से मतदाता अधिकार, चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े मुद्दे उठा रही है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में किसी पात्र मतदाता का नाम हटने की स्थिति में उसे कारण जानने और अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए।
पटवारी ने मध्यप्रदेश की SIR प्रक्रिया के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि दिसंबर 2025 की प्रारूप मतदाता सूची में 42,74,160 नाम कम हुए थे। दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया के बाद 21 फरवरी 2026 को प्रकाशित अंतिम सूची में 5,39,81,065 मतदाता दर्ज हुए और कांग्रेस के अनुसार अंतिम प्रक्रिया में 34,25,078 नाम हटाए गए। कांग्रेस ने इन नामों का विधानसभा, जिला और कारणवार विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है।
पटवारी ने कहा कि कांग्रेस यह जानना चाहती है कि प्रारूप सूची से बाहर हुए नामों में से कितने दावे-आपत्तियों के बाद वापस जोड़े गए, कितने नाम स्थानांतरण, मृत्यु या डुप्लीकेट प्रविष्टि के कारण हटाए गए और कितने मामलों में मतदाताओं के नाम बहाल किए गए। उन्होंने मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया से संबंधित आवेदनों का भी विस्तृत विवरण सार्वजनिक करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग मतदाता सूची तैयार करने और चुनाव प्रक्रिया संचालित करने वाली संवैधानिक संस्था है, इसलिए मतदाता सूची में होने वाले प्रत्येक बड़े बदलाव की प्रक्रिया और उसके कारणों को लेकर पारदर्शिता जरूरी है। उन्होंने मांग की कि SIR के दौरान हुए बदलावों का विधानसभा और बूथ स्तर तक विस्तृत विवरण सार्वजनिक किया जाए।
पटवारी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर भी कांग्रेस की आपत्तियां सामने रखीं और उनके पद से इस्तीफे की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़े सवालों पर आंदोलन जारी रखेगी। ये कांग्रेस की राजनीतिक मांगें हैं।
कांग्रेस ने मतदाता सूची से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग भी रखी है। पार्टी का कहना है कि यदि जांच में किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति द्वारा आपराधिक कृत्य प्रमाणित होता है तो संबंधित के खिलाफ एफआईआर और कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
पटवारी ने कहा कि वास्तविक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में बने रहें, इसके लिए कांग्रेस कार्यकर्ता गांव और बूथ स्तर पर मतदाता सूची की स्थिति की जानकारी लेंगे। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के नाम किसी कारण से सूची से हटे हैं, उन्हें नियमानुसार दावा, आपत्ति और अपील की प्रक्रिया की जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित 2023 के कानून में हुए बदलाव का मुद्दा भी उठाया। पटवारी ने कहा कि कांग्रेस चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया में सरकार की भूमिका और आयोग की संस्थागत स्वतंत्रता को लेकर अपनी आपत्तियां रखती रही है।
पटवारी ने EVM, VVPAT और मतदाता सूची से जुड़े सवालों पर भी चुनाव प्रक्रिया में अधिकतम पारदर्शिता की मांग की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का दावा है कि इन मुद्दों का समाधान संस्थागत और तकनीकी स्तर पर स्पष्ट जानकारी के माध्यम से होना चाहिए।
आगामी पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों को बैलेट पेपर से कराने की मांग भी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने उठाई। उन्होंने कहा कि स्थानीय चुनावों में मतपत्र के विकल्प पर विचार किया जाना चाहिए। यह कांग्रेस की मांग है।
उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से चुनाव संबंधी कार्यों में निष्पक्षता बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और अन्य अधिकारी संविधान और कानून के अनुसार अपनी जिम्मेदारी निभाएं।
पटवारी ने कहा कि कांग्रेस कार्यसमिति की आगामी बैठक में मतदाता सूची, चुनाव प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर देशव्यापी आंदोलन की रणनीति पर भी चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में 28 और 29 सितंबर का आंदोलन इसी अभियान का हिस्सा होगा।
कांग्रेस के अनुसार 28 सितंबर को भोपाल में निर्वाचन सदन का घेराव और 29 सितंबर को सभी जिला मुख्यालयों पर जिला निर्वाचन अधिकारी कार्यालयों का घेराव किया जाएगा। पार्टी ने इसे मतदाता अधिकार और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़े अपने अभियान की अगली कड़ी बताया है।