मतदाता सूची के केंद्रीकरण पर चुनाव आयोग का जवाब, कहा- 'ERO के अधिकार बरकरार'
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया के केंद्रीकरण और निर्वाचक रजिस्ट्रेशन अधिकारियों यानी ईआरओ की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों के बीच चुनाव आयोग के सूत्रों ने स्थिति स्पष्ट की है.
सूत्रों के मुताबिक, हर राज्य का चुनावी डेटाबेस पहले की तरह ही विकेंद्रीकृत है और निर्वाचक रजिस्ट्रेशन अधिकारियों (ईआरओ) के सभी वैधानिक और प्रक्रियात्मक अधिकार बरकरार हैं.
आयोग के सूत्रों ने कहा कि मतदाता सूची तैयार करने की मौजूदा व्यवस्था लागू कानूनों और चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुरूप ही संचालित हो रही है.
ड्राफ्ट और अंतिम मतदाता सूची का सत्यापन ईआरओ ने किया
चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक, ड्राफ्ट और अंतिम मतदाता सूची में शामिल मतदाताओं के सत्यापन की प्रक्रिया संबंधित विधानसभा क्षेत्रों के ईआरओ ने अपने स्तर पर पूरी की है.
मतदाता सूची तैयार करने और सत्यापन से जुड़ी पूरी प्रक्रिया संबंधित राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी यानी सीईओ की निगरानी में हुई है.
सूत्रों ने स्पष्ट किया कि किसी राज्य की मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया को केंद्रीकृत किए जाने की बात सही नहीं है.
राज्यों का चुनावी डेटाबेस पहले की तरह विकेंद्रीकृत है और संबंधित ईआरओ अपने वैधानिक दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं.
ECINET को कानून और आयोग के निर्देशों के तहत लागू किया गया
चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, ECINET प्लेटफॉर्म को लागू कानूनों और चुनाव आयोग की ओर से जारी निर्देशों के अनुरूप लागू किया गया है.
आयोग पहले भी कई मौकों पर इस संबंध में स्थिति स्पष्ट कर चुका है.
सूत्रों ने कहा कि ECINET प्लेटफॉर्म को लागू वैधानिक और नियामकीय प्रावधानों के तहत ही तैयार और संचालित किया गया है.
इसमें मतदाता सूची से जुड़े कामकाज के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया है.
ERO के अधिकारों पर नहीं लगी कोई रोक
सूत्रों ने ईआरओ के मतदाता सूची तक पहुंच और उनके अधिकारों पर रोक लगाए जाने की बात को भी खारिज किया है.
उनके मुताबि
📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
मतदाता सूची के केंद्रीकरण और निर्वाचक रजिस्ट्रेशन अधिकारियों (ईआरओ) के अधिकारों पर उठे सवालों के बीच चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक राज्य का चुनावी डेटाबेस अभी भी विकेंद्रीकृत है और ईआरओ के वैधानिक तथा प्रक्रियात्मक अधिकार बरकरार हैं। यह विषय महत्वपूर्ण है क्योंकि मतदाता सूची की सटीकता और पारदर्शिता चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता के लिए आधारभूत है। यदि केंद्रीकरण से डेटा में त्रुटियाँ या देरी होती है, तो मतदाताओं को गलत पंजीकरण या मतदान में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। जनता पर इसका