मातृभूमि का ऋण कर्म से चुकाना ही सच्ची राष्ट्रभक्ति, स्वावलंबी भारत से मजबूत होगी देश की अस्मिता

हम भारतवासी इस देश की मिट्टी से ही पैदा हुए। इसी में खेले-कूदे, इसी के अन्न-जल से हमारा पोषण हुआ। इसलिए हमारा कर्तव्य बनता है कि इसके हितों को कोई हानि न हमारे द्वारा हो और न ही किसी शत्रु के द्वारा होने पाए। राष्ट्रीय सम्पत्ति के साथ कोई हानि पहुँचाने वाली प्रक्रिया तथा कोई मामला राष्ट्रद्रोह के समान है।
इसलिए राष्ट्रहित में बनाई गई नागरिक संहिता के प्रति आस्था, विधिविधान का पालन करना और कराना, कर्म-निष्ठा, तपस्या, ज्ञान और लोक कल्याण की भावना परमावश्यक है। इनके प्रति शिथिलता बरती गई तो न आर्थिक विकास होगा न राष्ट्र की अस्मिता ...
📡 स्रोत: NewsData.io