अपराध

मऊ :CEC के पुतले को लेकर मऊ पुलिस और सपा कार्यकर्ताओं में छिना-झपटी,कब्जे में लेने का किया प्रयास।।।||Mau:A scuffle broke out between the Mau police and SP workers over the CEC's effigy, and an attempt was made to seize it.||

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 6 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति

मऊ : CEC के पुतले को लेकर मऊ पुलिस और सपा कार्यकर्ताओं में छिना-झपटी, कब्जे में लेने का किया प्रयास।।। इंडिया गठबंधन के विरोध मार्च के दौरान दिखा तनावपूर्ण माहौल।। ।।देवेन्द्र कुशवाहा।। दो टूक : इंडिया गठबंधन के आह्वान पर सोमवार को मऊ में आयोजित विरोध मार्च के दौरान उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब प्रदर्शनकारी समाजवादी पार्टी कार्यकर्ता मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के पुतले को लेकर आगे बढ़ने लगे।

पुतला लेकर जा रहे कार्यकर्ताओं को रोकने के दौरान पुलिस और सपा कार्यकर्ताओं के बीच छिना-झपटी हो गई। प्रदर्शन के दौरान सपा कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया और नारेबाजी करते हुए मार्च निकाला। पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया तथा पुतला अपने कब्जे में लेने की कोशिश की।

इसी दौरान पुलिसकर्मियों और कार्यकर्ताओं के बीच पुतले को लेकर कुछ देर तक खींचतान होती रही। घटना के चलते मौके पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। पुलिस अधिकारियों और मौजूद पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया। पुलिस का जोर प्रदर्शन को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने और किसी भी स्थिति में कानून-व्यवस्था प्रभावित न होने देने पर रहा।

वहीं, सपा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उनके पुतले को जबरन कब्जे में लेने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों और विरोध को लोकतांत्रिक तरीके से दर्ज कराने की बात कही। फिलहाल, विरोध मार्च के दौरान पुतले को लेकर पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच हुई छिना-झपटी का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

मौके पर पुलिस बल की मौजूदगी में स्थिति को नियंत्रित किया गया।

📡 स्रोत: NewsData.io

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🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत

इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि किसी भी विवाद का समाधान हिंसा से नहीं, बल्कि संवाद और कानूनी माध्यमों से होना चाहिए। यदि किसी के अधिकारों पर प्रश्न उठे, तो शांति से शिकायत दर्ज कर, न्यायालय या संबंधित प्राधिकरण से सहायता ली जा सकती है। समाज को चाहिए कि संघर्षों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने की संस्कृति को बढ़ावा दें, जिससे सभी के लिए सुरक्षित और समृद्ध वातावरण बना रहे।

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