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मौतें होती रहीं, सरकार यूसीसी में उलझी रही... क्या यही है मध्य प्रदेश सरकार की नीयत?

लेखक: admin अंतिम अपडेट: 4 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति

सही नीयत की राजनीति का मतलब व्यवस्था बनाना होता है। जनता के लिए बुनियादी सुविधाएं जुटाना होता है। कानून और इंसाफ कायम करना होता है। सरकार का काम लोगों के घरों में झांकना नहीं, बल्कि उनके घरों तक पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान पहुंचाना होता है।

लेकिन मध्य प्रदेश सरकार की राजनीति देखकर लगता है कि उसकी प्राथमिकताओं में जनता की समस्याएं कम और हिंदू-मुस्लिम ज्यादा है। जिन लोगों से व्यवस्था नहीं संभल रही, इंस्टीट्यूशन नहीं संभाले जा रहे, वे अब यूसीसी के जरिए लोगों के पारिवारिक मामलों में दखल देने की कोशिश कर रहे हैं। सवाल यह है कि ऐसे मामलों का प्रतिशत कितना है?

क्या यही मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी समस्या है? जनता परेशान है और मौतें हो रही हैं। छिंदवाड़ा में नकली और कथित जहरीली दवाओं से मौतों का मामला सामने आता है। इंदौर जैसे स्मार्ट सिटी में गंदे पानी की सप्लाई और उससे जुड़ी मौतों के सवाल उठते हैं। बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौतें होती हैं। लेकिन सरकार की प्राथमिकता क्या है?

यूसीसी। आदिवासी इलाकों में कुपोषण कोई आज की समस्या नहीं है। विशेषज्ञ वर्षों से आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों को अंडा जैसे पोषक आहार देने की सिफारिश करते रहे हैं। लेकिन यहां सवाल यह है कि बच्चे को पौष्टिक भोजन मिले या नहीं, उससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह हो गया है कि किसके खाने से किसका धर्म भ्रष्ट होगा।

मध्य प्रदेश सरकार की प्राथमिकता में अगर यूसीसी सबसे ऊपर है, तो यह सवाल पूछना जरूरी है कि आखिर क्यों? क्योंकि जनता को कानून चाहिए, लेकिन ऐसा कानून नहीं जो उसके घर के अंदर झांकने लगे। जनता को इंसाफ चाहिए, लेकिन ऐसा इंसाफ नहीं जो धर्म देखकर तय हो।

जनता को सरकार चाहिए, लेकिन ऐसी सरकार नहीं जो अपनी नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए धार्मिक मुद्दों को आगे कर दे। सरकार की प्राथमिकता में व्यवस्था जनित मौतें क्यों नहीं हैं?

छिंदवाड़ा में कथित नकली जहरीली दवाओं से मौतों का सवाल हो, इंदौर में दूषित पानी से होने वाली मौतों का सवाल हो या बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौतों का मामला—हर मौत एक परिवार की दुनिया उजाड़ती है। इन मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा? किस अधिकारी से सवाल होगा? किस व्यवस्था को जवाबदेह बनाया जाएगा?

अगर मरने वाला गाय होता तो शायद पूरे देश में हंगामा खड़ा हो जाता। लेकिन यहां तो बैगा जैसे संरक्षित आदिवासी समुदाय के बच्चे हैं। उनके मरने पर इतनी खामोशी क्यों? राजनीति धर्म के नाम पर भावनाएं भड़का कर वोट लेने का खेल नहीं है।

सही नीयत की राजनीति वह है जो अस्पतालों में डॉक्टर पहुंचाए, आंगनवाड़ियों में पोषण पहुंचाए, घरों में साफ पानी पहुंचाए और कानून का राज कायम करे। सरकार को तय करना होगा कि उसे जनता के वास्तविक सवाल हल करने हैं या जनता का ध्यान उन सवालों से हटाना है। क्योंकि सरकारें यूसीसी से अपनी नीयत साबित नहीं करतीं।

सरकारें तब साबित होती हैं, जब किसी गरीब का बच्चा भूख से न मरे, किसी परिवार को गंदे पानी से मौत का डर न हो और किसी मां को अपने बच्चे की लाश उठाकर यह सवाल न पूछना पड़े कि आखिर सरकार कर क्या रही है? बाकी सब राजनीति है।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

मध्य प्रदेश की सरकार पर लगातार मौतों के बीच यूसीसी (अपराध और अपराध नियंत्रण) के मामलों में उलझाव की आलोचना हो रही है। यह विषय सरकार की प्राथमिकताओं और नीतिगत दिशा को उजागर करता है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाती है कि सरकार की नीयत जनता के लिए बुनियादी सुविधाओं के बजाय धार्मिक मुद्दों पर केंद्रित है, जिससे सार्वजनिक विश्वास घट सकता है। यदि सरकार का ध्यान सामाजिक न्याय और सुरक्षा पर न होकर धार्मिक विवादों पर रहता है, तो आम जनता को पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहना पड

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