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मायावती भतीजी को सौंप सकती हैं पार्टी की कमान:कहा-दोनों भतीजों को पार्टी में कोई पद नहीं दूंगी, परिवारवाद के खिलाफ डटी हूं

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 17 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
मायावती भतीजी को सौंप सकती हैं पार्टी की कमान:कहा-दोनों भतीजों को पार्टी में कोई पद नहीं दूंगी, परिवारवाद के खिलाफ डटी हूं

बसपा सुप्रीमो मायावती के परिवार में विवाद बढ़ता जा रहा है। शनिवार को मायावती ने कहा कि पार्टी में मेरे दोनों भतीजों आकाश और ईशान को राजनीतिक पद नहीं मिलेगा। भविष्य में भतीजों के बच्चों को भी कोई पद नहीं मिलेगा। अगर भाई आनंद कुमार को मदद के लिए किसी सदस्य की जरूरत पड़ती है, तो वह अपनी इकलौती बेटी दीपिका आनंद (मायावती की भतीजी) की मदद ले सकते हैं।

उनकी ईमानदारी, निष्ठा और कार्यक्षमता के आधार पर भविष्य में उन्हें पार्टी में जिम्मेदारी दी जा सकती है। मायावती ने कहा कि कांशीराम की तरह मैं भी परिवारवाद के खिलाफ डटी रहूंगी। दीपिका फिलहाल वकालत की पढ़ाई कर रही हैं। आकाश से होने वाले नुकसान से बचने के लिए जेन-जी का दांव चला आकाश आनंद के निष्कासन से होने वाले संभावित नुकसान की काट के लिए मायावती ने 2027 के विधानसभा चुनावों में जेन-जी को 50% तक टिकट देने की बात कही।

मायावती ने कहा कि यूपी, उत्तराखंड और पंजाब के आगामी विधानसभा चुनावों में सर्वसमाज के कर्मठ, युवा और योग्य चेहरों को उम्मीदवार बनाने में प्राथमिकता दी जाएगी। मायावती ने कहा- नई पीढ़ी के जरिए देश में अंबेडकरवादी राजनीति और संवैधानिक मूल्यों को तेजी से मजबूत करना BSP का लक्ष्य होगा। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से उम्मीदवार चुनते समय सर्वसमाज के अच्छे लोगों के साथ युवा वर्ग को प्राथमिकता देने की अपील की।

इसमें महिला और पुरुष दोनों को प्रतिनिधित्व देने की बात कही। बेटी तैयार नहीं हुई, तो दलित मिशनरी कार्यकर्ता को जिम्मेदारी देंगे मायावती ने साफ किया कि अगर दीपिका इस जिम्मेदारी के लिए तैयार नहीं होती हैं, तो भाई आनंद पार्टी की आम सहमति से दलित समाज के किसी अन्य मिशनरी कार्यकर्ता को जिम्मेदारी सौंप सकते हैं।

लेकिन, उनके बेटों और आगे उनकी संतानों को यह जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। 'अगर मैं महिला नहीं होती, तो भाई को भी साथ नहीं रखती' मायावती ने कहा- अगर मैं महिला नहीं होती, तो अपने भाई-बहनों को भी अपने साथ नहीं रखती। महिला होने के कारण सुरक्षा और अन्य परेशानियों से बचने व सम्मान के साथ पार्टी में काम करने के लिए मुझे अपने सबसे छोटे भाई आनंद को अपने साथ रखना पड़ा।

हालांकि, अब भाई के परिवार के सदस्यों को लेकर बन रही परिस्थितियों के बावजूद मैं किसी तरह के मोह में नहीं पड़ूंगी। पार्टी को नुकसान नहीं होने दूंगी। 'कांशीराम की तरह मै

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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